हर्ष वर्धन वंश MCQ
Q1. हर्षवर्धन की राजधानी कहाँ थी?
A) पाटलिपुत्र
B) थानेसर
C) कन्नौज
D) उज्जैन
व्याख्या: हर्षवर्धन ने अपने शासन के प्रारंभिक चरण में थानेसर को राजधानी बनाया था जो कि वर्तमान हरियाणा में स्थित है। लेकिन बाद में, उसने राजनीतिक, व्यापारिक और भौगोलिक दृष्टिकोण से अधिक महत्त्वपूर्ण नगर कन्नौज को अपनी राजधानी बनाया। कन्नौज गंगा के किनारे बसा एक समृद्ध नगर था और उत्तर भारत की सत्ता का केंद्र बना।
Q2. हर्षवर्धन किस वंश से संबंधित था?
A) पुष्यभूति वंश
B) गुप्त वंश
C) मौर्य वंश
D) शुंग वंश
व्याख्या: हर्षवर्धन पुष्यभूति वंश का शासक था। इस वंश की स्थापना हर्ष के पूर्वज नरवर्धन ने की थी। हर्ष के पिता 'प्रभाकरवर्धन' और भाई 'राज्यवर्धन' के बाद हर्ष ने गद्दी संभाली। हर्ष के शासन में पुष्यभूति वंश अपने चरम पर पहुँचा और उत्तर भारत में उसकी शक्ति सर्वोच्च थी।
Q3. हर्षवर्धन के दरबार में चीनी यात्री ह्वेनसांग किस उद्देश्य से आया था?
A) व्यापार करने
B) युद्ध करने
C) राजनीति सीखने
D) बौद्ध धर्म का अध्ययन करने
व्याख्या: ह्वेनसांग चीन से भारत बौद्ध धर्म के महायान सम्प्रदाय का अध्ययन करने आया था। वह नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन हेतु भारत आया और हर्षवर्धन के दरबार में उसे विशेष सम्मान मिला। उसने भारतीय समाज, शिक्षा, धर्म, शासन व्यवस्था और हर्ष के उदार चरित्र का विस्तृत वर्णन किया है, जो इतिहास के लिए महत्त्वपूर्ण साक्ष्य है।
Q4. हर्षवर्धन ने किस धर्म को प्रमुखता दी?
A) हीनयान बौद्ध धर्म
B) महायान बौद्ध धर्म
C) जैन धर्म
D) शैव धर्म
व्याख्या: हर्षवर्धन प्रारंभ में शैव धर्म का अनुयायी था, लेकिन बाद में उसने महायान बौद्ध धर्म को अपना लिया। उसने बौद्ध भिक्षुओं को दान दिए, धार्मिक सभाएं आयोजित कीं और नालंदा विश्वविद्यालय को संरक्षण दिया। ह्वेनसांग के अनुसार हर्ष ने बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार में अहम भूमिका निभाई और उसे राज्याश्रय प्राप्त हुआ।
Q5. हर्षवर्धन किस प्रसिद्ध विश्वविद्यालय से जुड़ा हुआ था?
A) तक्षशिला
B) नालंदा
C) विक्रमशिला
D) वल्लभी
व्याख्या: नालंदा विश्वविद्यालय उस समय एशिया का सबसे प्रमुख बौद्ध शिक्षण संस्थान था। हर्षवर्धन ने नालंदा को प्रचुर मात्रा में धन, भूमि और संसाधनों का दान दिया। इस विश्वविद्यालय में चीन, तिब्बत, कोरिया आदि से छात्र पढ़ने आते थे। ह्वेनसांग ने भी यहाँ अध्ययन किया और विश्वविद्यालय की प्रशंसा की।
Q6. हर्षवर्धन की आत्मकथा 'हर्षचरित' किसने लिखी?
A) बाणभट्ट
B) ह्वेनसांग
C) तारणाथ
D) चरक
व्याख्या: बाणभट्ट हर्षवर्धन के दरबार के मुख्य राजकवि थे। उन्होंने 'हर्षचरित' नामक ग्रंथ लिखा, जो संस्कृत गद्य का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसमें हर्ष के जीवन, राजनीति, युद्ध, परिवार और प्रशासन का विस्तृत विवरण मिलता है। यह ग्रंथ ऐतिहासिक जानकारी के साथ-साथ साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध है।
Q7. हर्षवर्धन के काल में कौन-सा प्रसिद्ध धार्मिक सम्मेलन काशी में हुआ था?
A) शैव सम्मेलन
B) जैन संघ
C) बौद्ध महासभा
D) वैष्णव सम्मेलन
व्याख्या: हर्षवर्धन ने काशी (वाराणसी) में एक विशाल बौद्ध महासभा का आयोजन किया था, जिसमें ह्वेनसांग ने स्वयं बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय पर प्रवचन दिया। इस सभा में विविध धर्मों के विद्वान उपस्थित थे और धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण प्रस्तुत किया गया। यह हर्ष की धार्मिक उदारता को दर्शाता है।
Q8. हर्षवर्धन ने निम्नलिखित में से कौन-सी पुस्तक स्वयं लिखी?
A) कामसूत्र
B) अर्थशास्त्र
C) हर्षचरित
D) रत्नावली
व्याख्या: हर्षवर्धन केवल शासक ही नहीं, बल्कि एक कुशल लेखक भी था। उसने संस्कृत में तीन प्रसिद्ध नाटक लिखे — रत्नावली, प्रियदर्शिका और नागानंद। रत्नावली एक रोमांटिक नाटक है जो राजा और राजकुमारी की कथा पर आधारित है और उसमें तत्कालीन समाज की झलक मिलती है।
Q9. हर्षवर्धन की मृत्यु कब हुई थी?
A) 600 ईस्वी
B) 647 ईस्वी
C) 660 ईस्वी
D) 700 ईस्वी
व्याख्या: हर्षवर्धन की मृत्यु 647 ई. में हुई। चूँकि उसके कोई उत्तराधिकारी नहीं था, इस कारण उसके बाद पुष्यभूति वंश का अंत हो गया। उसकी मृत्यु के पश्चात् भारत में केंद्रीय सत्ता कमजोर पड़ गई और क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरने लगीं।
Q10. हर्षवर्धन के शासन काल में कौन-सा प्रसिद्ध तीर्थस्थल था जहाँ धार्मिक आयोजन होते थे?
A) अयोध्या
B) प्रयाग
C) मथुरा
D) नासिक
व्याख्या: हर्षवर्धन हर पाँच वर्षों में प्रयाग (वर्तमान इलाहाबाद) में एक विशाल धार्मिक सभा का आयोजन करता था, जिसे 'प्रयाग महोत्सव' कहा जाता है। इसमें वह धन, वस्त्र, और भोजन का दान करता था और विभिन्न धर्मों के विद्वान आमंत्रित होते थे। यह आयोजन धार्मिक सहिष्णुता और दानशीलता का प्रतीक था।
Q11. हर्षवर्धन के समकालीन दक्षिण भारत का शक्तिशाली राजा कौन था, जिसने उसे दक्षिण में रोक दिया?
A) पुलकेशिन II
B) महेन्द्रवर्मन
C) नरसिंहवर्मन
D) कृतिवर्मन
व्याख्या: चालुक्य वंश के प्रसिद्ध शासक पुलकेशिन II ने हर्षवर्धन को नर्मदा नदी के दक्षिण में रोक दिया था। पुलकेशिन II और हर्ष के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें हर्ष को दक्षिण की ओर बढ़ने से रोक दिया गया। इस घटना का उल्लेख अयोल के शिलालेख में भी मिलता है।
Q12. ह्वेनसांग ने भारत में किस प्रमुख धार्मिक उत्सव में भाग लिया था?
A) नालंदा उत्सव
B) काशी धर्मसभा
C) प्रयाग महोत्सव
D) वैशाली उत्सव
व्याख्या: हर्षवर्धन द्वारा प्रयाग में आयोजित किए जाने वाले महोत्सव में ह्वेनसांग ने भाग लिया। यह हर पाँच वर्ष में होता था जहाँ शासक खुद दान देता और सभी धर्मों के विद्वान आमंत्रित होते थे। यह उत्सव भारत की धार्मिक सहिष्णुता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
Q13. हर्षवर्धन के शासनकाल में किस क्षेत्र तक उनका साम्राज्य विस्तारित था?
A) कश्मीर से कन्याकुमारी तक
B) बंगाल से गुजरात तक
C) सिंध से असम तक
D) उत्तर में नेपाल से लेकर दक्षिण में नर्मदा तक
व्याख्या: हर्षवर्धन का साम्राज्य उत्तर भारत में फैला हुआ था। उत्तर में नेपाल, पूर्व में बंगाल, पश्चिम में पंजाब और दक्षिण में नर्मदा नदी तक उसकी सीमा थी। वह दक्षिण में पुलकेशिन II से पराजित हुआ, जिससे उसका साम्राज्य नर्मदा के पार नहीं जा सका।
Q14. हर्षवर्धन के समय कौन-सी प्रशासनिक प्रचलित थी?
A) गणराज्य प्रणाली
B) सामंती शासन
C) पंचायती शासन
D) केंद्रीकृत शासन प्रणाली
व्याख्या: हर्षवर्धन का शासन केंद्रीकृत था, जिसमें सारी शक्ति राजा के पास थी। हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ स्वायत्तता दी गई थी, लेकिन महत्वपूर्ण निर्णय और प्रशासनिक नियंत्रण राजा ही करता था। राजा के अधीन मंत्री, अधिकारी, और स्थानीय प्रशासक कार्य करते थे।
Q15. हर्षवर्धन ने किस प्रसिद्ध ब्राह्मण विद्वान को अपना मंत्री नियुक्त किया था?
A) विष्णुगुप्त
B) हर्षगुप्त
C) अवंति
D) वराहमिहिर
व्याख्या: अवंति नामक ब्राह्मण विद्वान को हर्षवर्धन ने अपना प्रमुख मंत्री नियुक्त किया था। वह धार्मिक मामलों के साथ-साथ राजनीतिक सलाहकार की भूमिका भी निभाता था। इससे स्पष्ट होता है कि हर्षवर्धन ब्राह्मणों को सम्मान देता था और विद्वानों को राज्य प्रशासन में शामिल करता था।
Q16. हर्षवर्धन के काल में मुख्य मुद्रा कौन-सी थी?
A) ताम्र मुद्रा
B) स्वर्ण मुद्रा
C) काष्ठ मुद्रा
D) चांदी मुद्रा
व्याख्या: हर्षवर्धन के शासनकाल में स्वर्ण मुद्राएं (सोने की) प्रचलित थीं, जिन पर उसका नाम और बौद्ध प्रतीक अंकित होते थे। इन मुद्राओं से न केवल आर्थिक समृद्धि का पता चलता है, बल्कि धार्मिक झुकाव की भी जानकारी मिलती है।
Q17. हर्षवर्धन की बहन का नाम क्या था?
A) देवकी
B) अंबा
C) राज्यश्री
D) पद्मावती
व्याख्या: हर्षवर्धन की बहन का नाम 'राज्यश्री' था। उसकी शादी मौखरी वंश के राजा ग्रहरथ से हुई थी। राज्यश्री के अपहरण और संकट की सूचना मिलने पर हर्ष ने कन्नौज पर आक्रमण कर बहन को बचाया और शासन संभाला।
Q18. हर्षवर्धन के समय किस विश्वविद्यालय में चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अध्ययन किया?
A) विक्रमशिला
B) वल्लभी
C) नालंदा
D) तक्षशिला
व्याख्या: ह्वेनसांग ने नालंदा विश्वविद्यालय में बौद्ध धर्म, विशेषकर महायान पर अध्ययन किया। नालंदा उस समय का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र था और हर्ष ने इसका संरक्षण किया था। ह्वेनसांग वहाँ कई वर्षों तक रहा और बाद में उसने ‘सी-यू-की’ नामक ग्रंथ लिखा।
Q19. हर्षवर्धन किस क्षेत्र का राज्यपाल था जब उसे सम्राट घोषित किया गया?
A) कन्नौज
B) पाटलिपुत्र
C) उज्जैन
D) थानेसर
व्याख्या: हर्षवर्धन को उसके भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के बाद थानेसर का राज्यपाल होने के नाते सम्राट घोषित किया गया। उसने तुरंत ही अपनी राजनीतिक कुशलता और सैन्य शक्ति के बल पर एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया।
Q20. हर्षवर्धन के शासन में किस प्रकार की धार्मिक नीति अपनाई गई थी?
A) धार्मिक सहिष्णुता
B) एक धर्म को थोपना
C) केवल बौद्ध धर्म को बढ़ावा
D) केवल शैव धर्म का प्रचार
व्याख्या: हर्षवर्धन ने धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाई। वह स्वयं बौद्ध धर्म का अनुयायी था, परंतु उसने ब्राह्मणों, जैनों और अन्य धर्मों को भी संरक्षण दिया। ह्वेनसांग ने भी उसकी उदारता और धर्मनिरपेक्षता की प्रशंसा की है।
Q21. हर्षवर्धन की धार्मिक प्रवृत्तियों का प्रमुख स्रोत कौन-सा है?
A) तारणाथ की रचना
B) ह्वेनसांग की यात्रा-वृत्तांत
C) विष्णुपुराण
D) राजतरंगिणी
व्याख्या: ह्वेनसांग ने भारत की अपनी यात्रा के दौरान हर्षवर्धन के शासन, धर्मनीति, सामाजिक व्यवस्था और नालंदा जैसे शिक्षा केंद्रों का वर्णन किया है। उसकी पुस्तक ‘सी-यू-की’ (बौद्ध रिकॉर्ड्स ऑफ द वेस्टर्न वर्ल्ड) हर्ष के शासनकाल की महत्वपूर्ण जानकारी देती है।
Q22. हर्षवर्धन ने किस भाषा में अपने नाटक और साहित्यिक कृतियाँ लिखी?
A) संस्कृत
B) प्राकृत
C) पाली
D) मगधी
व्याख्या: हर्षवर्धन विद्वान राजा था और उसने संस्कृत भाषा में तीन नाटकों – 'रत्नावली', 'प्रियदर्शिका' और 'नागानंद' – की रचना की। इन नाटकों में समाज, धर्म और स्त्री जीवन के अनेक पक्षों को दर्शाया गया है। संस्कृत उस समय दरबारी और साहित्यिक भाषा थी।
Q23. हर्षवर्धन का शासनकाल किस युग के अंत और किस युग की शुरुआत का संकेत देता है?
A) वैदिक युग से बौद्ध युग
B) गुप्त युग से मौर्य युग
C) मध्यकाल से आधुनिक काल
D) प्राचीन भारत से मध्यकालीन भारत
व्याख्या: हर्षवर्धन का शासनकाल भारतीय इतिहास में एक संक्रमण काल था। यह गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद आया और एकीकृत शासन की अंतिम छाया थी। उसके बाद भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया, जो मध्यकाल की विशेषता है। इसलिए यह काल प्राचीन भारत से मध्यकाल की ओर संक्रमण को दर्शाता है।
Q24. हर्षवर्धन किस प्रसिद्ध नदी के तट पर प्रयाग महोत्सव आयोजित करता था?
A) यमुना
B) गंगा
C) नर्मदा
D) सरस्वती
व्याख्या: प्रयाग (आज का इलाहाबाद/प्रयागराज) गंगा नदी के किनारे स्थित है। हर्षवर्धन हर पाँच वर्षों में यहाँ विशाल दान सभा का आयोजन करता था जिसे प्रयाग महोत्सव कहा जाता है। इसमें वह अपनी अधिकांश संपत्ति दान कर देता था और सभी धर्मों के लोगों को आमंत्रित करता था।
Q25. हर्षवर्धन ने अपनी बहन राज्यश्री को किस परिस्थिति से बचाया था?
A) आत्मदाह से
B) अपहरण से
C) बंदीगृह से
D) विवाह से
व्याख्या: राज्यश्री के पति मौखरी राजा की मृत्यु के बाद मालवा नरेश ने उसे बंदी बना लिया। इससे दुखी होकर राज्यश्री आत्मदाह करना चाहती थी। लेकिन हर्षवर्धन ने समय रहते उसे बचाया और मालवा के राजा को पराजित किया। इस घटना ने हर्ष को एक शक्तिशाली सम्राट बनने की प्रेरणा दी।
Q26. हर्षवर्धन के दरबार में बाणभट्ट के अतिरिक्त कौन अन्य विद्वान थे?
A) वराहमिहिर
B) भास
C) पाणिनि
D) मयूर
व्याख्या: मयूर संस्कृत के प्रसिद्ध कवि थे और बाणभट्ट के समकालीन थे। मयूर की रचना ‘सूर्यशतक’ प्रसिद्ध है। वह हर्षवर्धन के दरबार में विद्वान के रूप में सम्मिलित थे और उनके लेखन से उस काल की धार्मिक आस्था का बोध होता है।
Q27. हर्षवर्धन के शासनकाल में किस क्षेत्र में सबसे अधिक सांस्कृतिक उन्नति हुई?
A) कृषि
B) सैन्य संगठन
C) साहित्य और शिक्षा
D) स्थापत्य कला
व्याख्या: हर्षवर्धन के काल को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में स्वर्ण युग कहा जा सकता है। संस्कृत साहित्य का विकास हुआ, नालंदा विश्वविद्यालय उत्कर्ष पर था, और स्वयं हर्ष नाटककार था। बाणभट्ट और मयूर जैसे कवि उसकी सभा में थे।
Q28. हर्षवर्धन ने किस धार्मिक ग्रंथ या पुस्तक का अनुवाद करवाया?
A) भगवद गीता
B) महायान बौद्ध ग्रंथों का
C) जैन आगम
D) चारक संहिता
व्याख्या: हर्षवर्धन ने महायान बौद्ध ग्रंथों का संरक्षण और प्रचार किया। उसने ऐसे ग्रंथों का अनुवाद करवाया और उन्हें बौद्ध भिक्षुओं और शिक्षा संस्थानों में वितरित करवाया। ये ग्रंथ धार्मिक शिक्षाओं और दर्शन को आमजन तक पहुंचाने में सहायक बने।
Q29. हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद पुष्यभूति वंश का क्या हुआ?
A) वंश का अंत हो गया
B) उसका पुत्र शासक बना
C) बाणभट्ट शासक बना
D) राज्यश्री शासन में आई
व्याख्या: हर्षवर्धन की मृत्यु 647 ईस्वी में हुई और उसकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए पुष्यभूति वंश का अंत हो गया। इसके बाद उत्तरी भारत में कोई एकीकृत साम्राज्य नहीं रहा और क्षेत्रीय शक्तियों का उदय हुआ।
Q30. हर्षवर्धन के नाटकों का प्रमुख विषय क्या था?
A) युद्ध
B) व्यापार
C) सामाजिक और धार्मिक मूल्य
D) विज्ञान
व्याख्या: हर्षवर्धन के नाटकों में प्रेम, करुणा, धर्म, और नैतिकता की झलक मिलती है। ‘नागानंद’ नाटक में बौद्ध धर्म और त्याग का संदेश है, जबकि 'रत्नावली' और 'प्रियदर्शिका' में प्रेम और सामाजिक मर्यादा को दर्शाया गया है। ये नाटक उस युग के सांस्कृतिक मूल्यों को दर्शाते हैं।
Q31. हर्षवर्धन के काल में सबसे अधिक प्रचलित धर्म कौन-सा था?
A) शैव धर्म
B) वैष्णव धर्म
C) बौद्ध धर्म (महायान)
D) जैन धर्म
व्याख्या: हर्षवर्धन का झुकाव बौद्ध धर्म, विशेषतः महायान शाखा की ओर था। उसने बौद्ध विहारों का निर्माण कराया और बौद्ध भिक्षुओं को संरक्षण दिया। ह्वेनसांग के विवरणों से यह ज्ञात होता है कि उस काल में महायान बौद्ध धर्म अत्यंत प्रभावी था, हालांकि अन्य धर्मों को भी संरक्षण मिला।
Q32. हर्षवर्धन के शासनकाल में व्यापार और वाणिज्य की स्थिति कैसी थी?
A) कमजोर और अनियमित
B) केवल विदेश व्यापार तक सीमित
C) सिर्फ कृषि आधारित
D) समृद्ध और व्यवस्थित
व्याख्या: हर्षवर्धन के शासन में व्यापार और वाणिज्य फला-फूला। भूमि मार्ग और जलमार्ग दोनों के माध्यम से व्यापार होता था। व्यापारिक केंद्रों और मेला आयोजनों से व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ीं। राज्य की समृद्धि में व्यापार की प्रमुख भूमिका थी।
Q33. हर्षवर्धन के समय किस धातु की मुद्रा प्रमुख थी?
A) सोने की मुद्रा (स्वर्ण)
B) तांबे की मुद्रा
C) लोहे की मुद्रा
D) कागजी मुद्रा
व्याख्या: हर्षवर्धन ने स्वर्ण मुद्राएं चलाईं जिनमें बौद्ध प्रतीक और शिलालेख अंकित होते थे। ये मुद्राएं उसकी आर्थिक स्थिति और धार्मिक प्रवृत्तियों का भी परिचय देती हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्वर्ण मुद्रा का व्यापक प्रचलन था।
Q34. हर्षवर्धन द्वारा लिखे गए ‘नागानंद’ नाटक का मुख्य पात्र कौन है?
A) राजा विक्रम
B) राजकुमार जिमूतवाहन
C) बोधिसत्व
D) नागराज
व्याख्या: 'नागानंद' नाटक में राजकुमार जिमूतवाहन मुख्य पात्र है, जो दूसरों के कल्याण हेतु स्वयं का बलिदान देता है। यह बौद्ध करुणा और त्याग की भावना को दर्शाता है। हर्षवर्धन की धार्मिक भावना और साहित्यिक कौशल इस नाटक में प्रकट होती है।
Q35. हर्षवर्धन के समकालीन पश्चिमी एशिया में कौन-सी प्रमुख शक्ति थी?
A) रोमन साम्राज्य
B) ओटोमन साम्राज्य
C) सासानी साम्राज्य
D) अब्बासी खिलाफत
व्याख्या: हर्षवर्धन के समय पश्चिमी एशिया में सासानी साम्राज्य (Sassanid Empire) प्रमुख शक्ति था। यह साम्राज्य ईरान में था और भारत के साथ व्यापारिक संबंध रखता था। इस काल में भारत और सासानी क्षेत्रों के बीच रेशम मार्ग आदि से व्यापार भी होता था।
Q36. हर्षवर्धन की सेना में कौन-से अंग प्रमुख थे?
A) पैदल सेना, अश्वसेना, रथ और हाथी
B) केवल पैदल और घुड़सवार
C) केवल हाथी और नाविक
D) केवल धनुर्धारी सैनिक
व्याख्या: हर्षवर्धन की सेना में चार अंग थे – पैदल सेना, घुड़सवार, रथ और युद्ध हाथी। ये प्राचीन भारतीय सेना के परंपरागत अंग थे। हाथियों का प्रयोग विशेष रूप से युद्ध के निर्णायक चरणों में होता था।
Q37. हर्षवर्धन की धार्मिक नीति को किस शब्द से व्यक्त किया जा सकता है?
A) धर्मद्रोह
B) अधार्मिक शासन
C) केवल बौद्ध पक्षपात
D) सर्वधर्म समभाव
व्याख्या: हर्षवर्धन ने भले ही बौद्ध धर्म को संरक्षण दिया, लेकिन उसने सभी धर्मों का समान सम्मान किया। उसने ब्राह्मणों, जैनों और अन्य संप्रदायों को भी संरक्षण प्रदान किया। यह नीति 'सर्वधर्म समभाव' के अनुरूप थी और भारत की धार्मिक सहिष्णुता को दर्शाती है।
Q38. हर्षवर्धन किस कला का विशेष संरक्षक था?
A) नाट्य और साहित्य
B) स्थापत्य कला
C) चित्रकला
D) मूर्तिकला
व्याख्या: हर्षवर्धन स्वयं लेखक और नाटककार था। उसने तीन नाटकों की रचना की। उसकी सभा में कई कवि और लेखक मौजूद थे। उसने साहित्यिक विद्वानों को सम्मान और आश्रय दिया। यह दर्शाता है कि वह नाट्यकला और साहित्य का बड़ा संरक्षक था।
Q39. किस विद्वान ने हर्षवर्धन को ‘शुद्ध बुद्धधर्म का रक्षक’ कहा?
A) बाणभट्ट
B) ह्वेनसांग
C) पाणिनि
D) विष्णु शर्मा
व्याख्या: ह्वेनसांग ने अपने यात्रा विवरण में हर्षवर्धन को ‘शुद्ध बुद्धधर्म का रक्षक’ कहा है। उसने यह उल्लेख किया कि हर्ष न केवल बौद्ध धर्म का अनुयायी था, बल्कि उसका सक्रिय प्रचारक और रक्षक भी था।
Q40. हर्षवर्धन की शासन व्यवस्था का आधार क्या था?
A) पंचायतों की स्वतंत्रता
B) धार्मिक संगठनों का शासन
C) सामंतशाही पूर्ण
D) राजा की केंद्रीय सत्ता
व्याख्या: हर्षवर्धन की शासन व्यवस्था पूरी तरह केंद्रीकृत थी। राजा सर्वोच्च सत्ता था और सभी प्रशासनिक निर्णय उसके आदेश से होते थे। उसके अधीनस्थ अधिकारी शासन कार्यों में सहयोग करते थे। इससे हर्ष का नियंत्रण पूरे साम्राज्य पर बना रहता था।
Q41. हर्षवर्धन ने किस विश्वविद्यालय को विशेष संरक्षण दिया?
A) तक्षशिला विश्वविद्यालय
B) विक्रमशिला विश्वविद्यालय
C) नालंदा विश्वविद्यालय
D) वल्लभी विश्वविद्यालय
व्याख्या: हर्षवर्धन ने नालंदा विश्वविद्यालय को विशेष संरक्षण प्रदान किया। यह बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था जहाँ देश-विदेश से छात्र अध्ययन के लिए आते थे। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहाँ अध्ययन किया और इसे अत्यंत उच्च शिक्षण संस्थान बताया।
Q42. हर्षवर्धन ने किस लेखक को अपना ‘राजकवि’ नियुक्त किया था?
A) बाणभट्ट
B) मयूर
C) भवभूति
D) कालिदास
व्याख्या: बाणभट्ट हर्षवर्धन का राजकवि था। उसने 'हर्षचरित' और 'कादंबरी' जैसे प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की, जो हर्ष के जीवन, शासन और समकालीन समाज का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। बाणभट्ट का साहित्यिक योगदान संस्कृत गद्य को चरम पर ले गया।
Q43. हर्षवर्धन ने 'प्रियदर्शिका' नामक नाटक किस विषय पर लिखा था?
A) युद्ध और वीरता
B) भिक्षु जीवन
C) प्रेम और सामाजिक जीवन
D) धर्मशास्त्र
व्याख्या: 'प्रियदर्शिका' एक प्रेम कथा पर आधारित संस्कृत नाटक है। इसमें शाही प्रेम, स्त्री पात्रों की भूमिका और सामाजिक मर्यादा को दर्शाया गया है। यह दर्शाता है कि हर्ष केवल सम्राट ही नहीं, बल्कि संवेदनशील साहित्यकार भी था।
Q44. हर्षवर्धन ने अपना शासन किस वर्ष में प्रारंभ किया था?
A) 606 ईस्वी
B) 590 ईस्वी
C) 620 ईस्वी
D) 630 ईस्वी
व्याख्या: हर्षवर्धन ने 606 ईस्वी में अपने भाई राज्यवर्धन की मृत्यु के बाद शासन संभाला। 41 वर्ष तक उसने शासन किया और 647 ईस्वी में उसकी मृत्यु हुई। उसका शासन उत्तर भारत में राजनीतिक स्थिरता और सांस्कृतिक विकास का प्रतीक है।
Q45. हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत में कौन-सी शक्ति उभर कर आई?
A) गुप्त
B) शक
C) कुषाण
D) राष्ट्रकूट
व्याख्या: हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद उत्तर भारत में कोई मजबूत केंद्रीय शक्ति नहीं रही। इसी समय दक्षिण भारत में राष्ट्रकूटों का उदय हुआ, जो आगे चलकर एक प्रमुख शक्ति बने। भारत पुनः छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित हो गया।
Q46. हर्षवर्धन का सबसे बड़ा सैन्य प्रतिद्वंदी कौन था?
A) समुद्रगुप्त
B) चालुक्य राजा पुलकेशिन II
C) शक नरेश रुड्रदामन
D) खारवेल
व्याख्या: हर्षवर्धन का सबसे बड़ा सैन्य प्रतिद्वंदी चालुक्य राजा पुलकेशिन II था। नर्मदा नदी के पास इन दोनों के बीच युद्ध हुआ जिसमें पुलकेशिन ने हर्ष को दक्षिण भारत में प्रवेश से रोक दिया। यह हर्ष की एकमात्र सैन्य हार मानी जाती है।
Q47. हर्षवर्धन का साम्राज्य किस प्रकार का था?
A) उत्तर भारत में विस्तृत केंद्रीकृत साम्राज्य
B) दक्षिण भारत तक फैला साम्राज्य
C) केवल पूर्वी भारत तक सीमित
D) बिखरे हुए गणराज्यों का संघ
व्याख्या: हर्षवर्धन का साम्राज्य उत्तर भारत में फैला हुआ था, जिसमें पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल और नेपाल शामिल थे। उसका प्रशासन केंद्रीकृत था और उसने धार्मिक सहिष्णुता के साथ स्थिर शासन प्रदान किया।
Q48. हर्षवर्धन की प्रमुख उपलब्धि क्या मानी जाती है?
A) विदेश विजय
B) समुद्र अभियान
C) उत्तर भारत का एकीकरण
D) खजाना निर्माण
व्याख्या: हर्षवर्धन की सबसे बड़ी उपलब्धि उत्तर भारत का राजनीतिक एकीकरण था। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद उत्तर भारत अनेक छोटे राज्यों में बँट गया था, जिसे हर्ष ने एक किया और स्थिर प्रशासन स्थापित किया।
Q49. हर्षवर्धन ने किस स्थान को अपनी राजधानी बनाया था?
A) कन्नौज
B) थानेसर
C) पाटलिपुत्र
D) उज्जैन
व्याख्या: हर्षवर्धन ने पहले थानेसर को राजधानी बनाया था, लेकिन बाद में कन्नौज को राजधानी बनाया। यह रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण था। कन्नौज उत्तर भारत का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बन गया।
Q50. हर्षवर्धन की नीतियाँ किस आदर्श का प्रतिनिधित्व करती थीं?
A) केवल सैन्य विस्तार
B) कर वृद्धि
C) जातीय संघर्ष
D) धर्म आधारित शासन और जनकल्याण
व्याख्या: हर्षवर्धन की नीतियाँ धर्म, दान और जनकल्याण पर आधारित थीं। उसने शिक्षा, स्वास्थ्य, धर्म, साहित्य आदि क्षेत्रों में अनेक सुधार किए। प्रयाग महोत्सव जैसे आयोजन उसकी नीति को दर्शाते हैं, जहाँ वह विशाल मात्रा में दान देता था।
Q51. हर्षवर्धन की जीवनी "हर्षचरित" किसने लिखी थी?
A) बाणभट्ट
B) ह्वेनसांग
C) मयूर
D) भवभूति
व्याख्या: 'हर्षचरित' हर्षवर्धन की जीवनी है जिसे बाणभट्ट ने लिखा था। यह संस्कृत में रचित एक महत्वपूर्ण गद्य रचना है जिसमें हर्ष की वंशावली, युवावस्था, सैन्य उपलब्धियाँ, और शासन के विवरण मिलते हैं। यह समकालीन भारत के इतिहास और समाज की जानकारी का प्रमुख स्रोत है।
Q52. हर्षवर्धन किस वंश का अंतिम शासक था?
A) गुप्त वंश
B) मौर्य वंश
C) शुंग वंश
D) पुष्यभूति वंश
व्याख्या: हर्षवर्धन पुष्यभूति वंश का सबसे प्रसिद्ध और अंतिम शासक था। उसकी मृत्यु के बाद इस वंश का अंत हो गया क्योंकि उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था। पुष्यभूति वंश की स्थापना पुष्यभूति नामक राजा ने की थी और थानेसर इसकी प्रारंभिक राजधानी थी।
Q53. ह्वेनसांग ने भारत की यात्रा किस काल में की थी?
A) समुद्रगुप्त के शासनकाल में
B) अशोक के शासनकाल में
C) हर्षवर्धन के शासनकाल में
D) विक्रमादित्य के शासनकाल में
व्याख्या: चीनी यात्री ह्वेनसांग ने 7वीं शताब्दी में भारत की यात्रा की थी जब हर्षवर्धन का शासन चल रहा था। उसने भारत के धार्मिक, सामाजिक, शैक्षिक और राजनीतिक जीवन का अत्यंत विस्तृत विवरण लिखा, जो इतिहास के लिए अत्यंत मूल्यवान है।
Q54. हर्षवर्धन की शासन व्यवस्था में किस पदाधिकारी का कार्य भूमि राजस्व वसूलना था?
A) महासंधिविग्रहिक
B) महादंडनायक
C) भूमि अधिकारी (भूमिकृद)
D) सामंत
व्याख्या: हर्षवर्धन के शासन में भूमि से प्राप्त राजस्व प्रशासन का मुख्य स्रोत था। भूमिकृद या भूमिकरक अधिकारी भूमि का सर्वेक्षण और कर संग्रह का कार्य करते थे। ये स्थानीय अधिकारी थे जो किसानों और गांवों से कर वसूलते थे।
Q55. हर्षवर्धन की मृत्यु किस वर्ष में हुई थी?
A) 647 ईस्वी
B) 606 ईस्वी
C) 550 ईस्वी
D) 700 ईस्वी
व्याख्या: हर्षवर्धन की मृत्यु 647 ईस्वी में हुई थी। चूंकि उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, इसलिए उसके पश्चात उसके साम्राज्य का विघटन हो गया और पुष्यभूति वंश का अंत हो गया। इसके बाद भारत में क्षेत्रीय शक्तियाँ उभरने लगीं।
Q56. हर्षवर्धन ने किस नगर में अपनी राजधानी को स्थानांतरित किया था?
A) पाटलिपुत्र से उज्जैन
B) काशी से प्रयाग
C) अयोध्या से मिथिला
D) थानेसर से कन्नौज
व्याख्या: हर्षवर्धन ने अपने शासन की शुरुआत थानेसर से की थी, लेकिन बाद में साम्राज्य के विस्तार और प्रशासनिक सुविधा के लिए उसने राजधानी को कन्नौज स्थानांतरित कर दिया। कन्नौज एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और राजनीतिक केंद्र था।
Q57. हर्षवर्धन किस धर्म से प्रारंभ में संबंधित था?
A) बौद्ध धर्म
B) शैव धर्म
C) वैष्णव धर्म
D) जैन धर्म
व्याख्या: हर्षवर्धन प्रारंभ में शैव धर्म को मानता था, लेकिन बाद में उसका झुकाव महायान बौद्ध धर्म की ओर हो गया। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार-प्रसार किया, बौद्ध भिक्षुओं को संरक्षण दिया और नालंदा जैसे संस्थानों को दान दिया।
Q58. हर्षवर्धन ने किस प्रकार की कर नीति अपनाई थी?
A) अत्यधिक कर वसूली
B) केवल सैनिकों से कर
C) नरम और जनहितकारी
D) बिना कर के शासन
व्याख्या: हर्षवर्धन की कर नीति जनहितकारी थी। किसानों पर कर भार अधिक नहीं था। कर की वसूली में अनुशासन और नियमितता थी। उसने व्यापारियों और गांवों से भी उचित कर वसूले और धर्मार्थ कार्यों में भारी धन खर्च किया।
Q59. हर्षवर्धन के प्रयाग महोत्सव में कौन-कौन भाग लेते थे?
A) केवल बौद्ध भिक्षु
B) ब्राह्मण, बौद्ध, जैन और आमजन
C) केवल ब्राह्मण
D) केवल सैनिक
व्याख्या: हर्षवर्धन हर पाँच साल में प्रयाग में महादान करता था जिसे प्रयाग महोत्सव कहा जाता था। इसमें ब्राह्मण, बौद्ध, जैन, साधु, और सामान्य जनता को दान दिया जाता था। यह धार्मिक सहिष्णुता और जनकल्याण की मिसाल था।
Q60. हर्षवर्धन के समय भारत में शिक्षा का प्रमुख केंद्र कौन था?
A) नालंदा
B) तक्षशिला
C) वल्लभी
D) विक्रमशिला
व्याख्या: हर्षवर्धन के काल में नालंदा विश्वविद्यालय बौद्ध शिक्षा और दर्शन का प्रमुख केंद्र था। यहाँ हजारों छात्र और शिक्षक रहते थे। ह्वेनसांग भी यहाँ अध्ययन करने आए थे। राज्य से इस विश्वविद्यालय को विशेष संरक्षण और दान मिलता था।
Q61. हर्षवर्धन के शासनकाल में प्रयाग महोत्सव कितने वर्षों में एक बार आयोजित होता था?
A) हर 10 वर्ष में
B) हर 3 वर्ष में
C) हर 5 वर्ष में
D) प्रतिवर्ष
व्याख्या: हर्षवर्धन हर पाँच वर्षों में प्रयाग (आधुनिक इलाहाबाद) में एक विशाल धर्म-दान महोत्सव का आयोजन करता था। इस समारोह में वह अपना पूरा राजकोष दान में दे देता था और धर्म, करुणा, व सेवा के आदर्शों को बढ़ावा देता था।
Q62. हर्षवर्धन के समय किसने बौद्ध धर्म का प्रचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई?
A) चाणक्य
B) अश्वघोष
C) कुमारिल भट्ट
D) ह्वेनसांग
व्याख्या: चीनी यात्री ह्वेनसांग न केवल बौद्ध धर्म का अनुयायी था, बल्कि उसने हर्षवर्धन के दरबार में रहकर बौद्ध धर्म के प्रचार में भी योगदान दिया। वह नालंदा विश्वविद्यालय में अध्ययन करने आया था और भारत में रहकर महायान बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रसार किया।
Q63. हर्षवर्धन ने किस प्रसिद्ध सभा का आयोजन किया था जहाँ ह्वेनसांग ने भाग लिया?
A) कन्याकुब्ज सभा
B) वैशाली सभा
C) उज्जैन सभा
D) तक्षशिला सभा
व्याख्या: हर्षवर्धन ने कन्याकुब्ज (कन्नौज) में एक विशाल धार्मिक सभा का आयोजन किया था जिसमें भारत के विभिन्न कोनों से विद्वान और धर्माचार्य उपस्थित हुए थे। ह्वेनसांग को उसमें मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया था।
Q64. हर्षवर्धन के दरबार में ‘मयूर’ किस रूप में प्रसिद्ध था?
A) सेनापति
B) कवि
C) ज्योतिषाचार्य
D) पुरोहित
व्याख्या: मयूर हर्षवर्धन के दरबार के प्रसिद्ध कवि थे। उन्हें संस्कृत काव्य रचना में उच्च स्थान प्राप्त था। "सूर्यशतक" उनकी प्रसिद्ध रचना मानी जाती है। वे बाणभट्ट के समकालीन थे।
Q65. हर्षवर्धन ने निम्न में से कौन-से नाटक की रचना नहीं की?
A) मालविकाग्निमित्र
B) प्रियदर्शिका
C) रत्नावली
D) नागानंद
व्याख्या: 'मालविकाग्निमित्र' कालिदास की रचना है, न कि हर्षवर्धन की। हर्षवर्धन ने तीन संस्कृत नाटकों – प्रियदर्शिका, रत्नावली और नागानंद – की रचना की थी। ये नाटक सामाजिक, धार्मिक और प्रेम विषयों से संबंधित हैं।
Q66. हर्षवर्धन के समय ब्राह्मणों को किस प्रकार की भूमि दी जाती थी?
A) भूमिकृद
B) चौरासी
C) अग्रहार
D) मलिकाना
व्याख्या: अग्रहार वह भूमि थी जो ब्राह्मणों को दान में दी जाती थी। ये भूमि कर-मुक्त होती थी और धार्मिक व शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए दी जाती थी। हर्षवर्धन के समय यह परंपरा अत्यंत प्रचलित थी और शिलालेखों में इसका उल्लेख मिलता है।
Q67. हर्षवर्धन ने विदेशी संबंधों के लिए कौन-सी नीति अपनाई थी?
A) युद्ध और आक्रमण
B) विदेशों से दूरी
C) साम्राज्य विस्तार
D) कूटनीतिक शिष्टमंडलों का आदान-प्रदान
व्याख्या: हर्षवर्धन ने चीन के तांग वंश से मैत्री संबंध बनाए। उसने एक राजदूत को चीन भेजा और बदले में चीन से भी शिष्टमंडल भारत आया। इस तरह कूटनीतिक स्तर पर उसने शांति और सहयोग की नीति अपनाई।
Q68. हर्षवर्धन की धार्मिक सभा में बौद्ध धर्म के किस रूप की चर्चा होती थी?
A) महायान
B) हीनयान
C) वज्रयान
D) थेरवाद
व्याख्या: हर्षवर्धन महायान बौद्ध धर्म से प्रभावित था। उसकी सभाओं में महायान विचारों की चर्चा होती थी। महायान शाखा में बुद्ध को ईश्वरवत् माना गया और करुणा, भक्ति तथा बोधिसत्व विचार महत्वपूर्ण थे।
Q69. हर्षवर्धन का शासनकाल किस दृष्टि से ‘संस्कृति का पुनर्जागरण काल’ माना जाता है?
A) साहित्य, कला और धर्म का उत्कर्ष
B) केवल सैन्य विजय
C) व्यापारिक पतन
D) खजाना संग्रह
व्याख्या: हर्षवर्धन के समय साहित्य, नाट्यकला, स्थापत्य, धार्मिक आयोजन, और शिक्षा का चरम विकास हुआ। इसीलिए इसे 'प्राचीन भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण काल' माना जाता है।
Q70. हर्षवर्धन के समय प्रयाग में किस नदी के किनारे महोत्सव होता था?
A) यमुना
B) सरस्वती
C) गंगा
D) गोदावरी
व्याख्या: प्रयाग (वर्तमान प्रयागराज) गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित है। हर्षवर्धन का प्रयाग महोत्सव गंगा के किनारे आयोजित होता था, जो पवित्रता और धार्मिकता का प्रतीक माना जाता था।
Q71. हर्षवर्धन के समय मुख्य प्रशासनिक इकाई क्या कहलाती थी?
A) भुक्ति
B) मंडल
C) राज्य
D) नगर
व्याख्या: हर्षवर्धन के प्रशासन में "भुक्ति" मुख्य प्रशासनिक इकाई थी। प्रत्येक भुक्ति के अधीन "विषय" और "ग्राम" होते थे। भुक्ति का शासन एक “उपरिक” नामक अधिकारी करता था। यह प्रशासनिक ढांचा गुप्तकाल की व्यवस्था से प्रभावित था।
Q72. हर्षवर्धन के शासन में न्यायिक प्रणाली कैसी थी?
A) केवल दंड आधारित
B) राजा की इच्छा पर आधारित
C) जनता द्वारा संचालित
D) धर्म और दंड पर आधारित
व्याख्या: हर्षवर्धन के शासनकाल में न्याय व्यवस्था धर्म और दंड के सिद्धांतों पर आधारित थी। राजा न्याय का सर्वोच्च स्रोत माना जाता था, परंतु धार्मिक ग्रंथों एवं स्मृतियों को भी आधार बनाया जाता था। अपराधों के लिए कठोर दंड निर्धारित थे।
Q73. हर्षवर्धन की धार्मिक नीति कैसी थी?
A) सहिष्णुता और बहु-धर्मिक
B) केवल बौद्ध धर्म पर आधारित
C) केवल ब्राह्मणों को प्राथमिकता
D) कट्टर शैव धर्म पर आधारित
व्याख्या: हर्षवर्धन की धार्मिक नीति सहिष्णु थी। यद्यपि वह स्वयं महायान बौद्ध धर्म को मानता था, लेकिन उसने ब्राह्मणों को दान दिए, जैन मुनियों को सम्मान दिया और विभिन्न धर्मों को संरक्षण प्रदान किया। यह नीति भारत में धार्मिक सौहार्द को बढ़ावा देती थी।
Q74. हर्षवर्धन द्वारा रचित "नागानंद" नाटक का प्रमुख विषय क्या है?
A) राम की कथा
B) कृष्ण की बाल लीलाएं
C) बुद्ध और बोधिसत्व की करुणा
D) महाभारत युद्ध
व्याख्या: 'नागानंद' नाटक बुद्ध और बोधिसत्व की करुणा और त्याग की भावना पर आधारित है। इसमें जीवों के प्रति प्रेम, त्याग और धर्म के सिद्धांतों को नाट्यरूप में प्रस्तुत किया गया है। यह दर्शाता है कि हर्षवर्धन धार्मिक सहिष्णु और नैतिक मूल्यों में विश्वास रखने वाला शासक था।
Q75. हर्षवर्धन के काल में कौन-सी धातु की मुद्राएँ प्रचलित थीं?
A) स्वर्ण और तांबा
B) केवल चांदी
C) केवल तांबा
D) केवल लोहे की
व्याख्या: हर्षवर्धन के काल में मुख्य रूप से स्वर्ण और तांबे की मुद्राएं प्रचलन में थीं। गुप्तकालीन शैली की ये मुद्राएं धार्मिक प्रतीकों और शिल्पकला से युक्त होती थीं, जिससे उस काल की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का बोध होता है।
Q76. हर्षवर्धन की सैन्य शक्ति में प्रमुख रूप से कौन-कौन सी इकाइयाँ थीं?
A) केवल पैदल और हाथी
B) केवल घुड़सवार
C) पैदल, घुड़सवार, हाथी और रथ
D) केवल रथ और तीरंदाज
व्याख्या: हर्षवर्धन की सेना में चारों प्रकार की इकाइयाँ शामिल थीं – पैदल सैनिक, घुड़सवार, रथ और हाथी। यह प्राचीन भारतीय युद्ध प्रणाली की एक विशेषता थी जो सामरिक संतुलन और प्रभावशाली आक्रमण क्षमता को दर्शाती थी।
Q77. हर्षवर्धन की राजधानी कन्नौज किस नदी के किनारे स्थित है?
A) यमुना
B) सरस्वती
C) गंगा
D) शिप्रा
व्याख्या: कन्नौज गंगा नदी के तट पर स्थित है। गंगा के तट पर बसे इस नगर ने हर्षवर्धन के समय में राजनीतिक, धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।
Q78. हर्षवर्धन के समय किस प्रकार का कर सबसे प्रमुख था?
A) पशु कर
B) जल कर
C) सैनिक कर
D) भूमि कर
व्याख्या: भूमि कर हर्षवर्धन की आय का प्रमुख स्रोत था। यह किसानों से उपज का एक भाग कर के रूप में लिया जाता था। कर संग्रह की व्यवस्था व्यवस्थित थी और इसे भूमिकृद जैसे अधिकारी देखरेख करते थे।
Q79. हर्षवर्धन के समय किस वर्ग को विशेष दान दिए जाते थे?
A) केवल सैनिक
B) ब्राह्मण और बौद्ध भिक्षु
C) केवल व्यापारी
D) केवल महिला वर्ग
व्याख्या: हर्षवर्धन धार्मिक एवं दानशील शासक था। उसने प्रयाग महोत्सव में ब्राह्मणों को भूमि, वस्त्र, आभूषण और धन दिया। साथ ही बौद्ध भिक्षुओं और जैन मुनियों को भी संरक्षण और दान प्रदान किया।
Q80. हर्षवर्धन ने अपने धार्मिक कार्यों के लिए कौन-सा नगर विशेष रूप से चुना था?
A) प्रयाग
B) उज्जैन
C) वाराणसी
D) पाटलिपुत्र
व्याख्या: प्रयाग (वर्तमान प्रयागराज) हर्षवर्धन के धार्मिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र था। वह यहाँ हर पाँच वर्ष में प्रयाग महोत्सव का आयोजन करता था और व्यापक रूप से दान-पुण्य करता था।
Q81. हर्षवर्धन ने दक्षिण भारत की किस शक्ति से पराजय का सामना किया था?
A) पल्लव वंश
B) चेर वंश
C) चालुक्य वंश
D) पांड्य वंश
व्याख्या: हर्षवर्धन ने दक्षिण भारत की ओर अपने साम्राज्य को विस्तार देने का प्रयास किया लेकिन उसे चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय से हार का सामना करना पड़ा। पुलकेशिन द्वितीय ने हर्ष को नर्मदा नदी के दक्षिण में आने से रोक दिया। यह घटना दक्षिण की स्वतंत्र शक्ति को दर्शाती है।
Q82. हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद भारत की राजनीतिक स्थिति कैसी हो गई?
A) विदेशी आक्रमणों की बाढ़
B) मुस्लिम शासन की स्थापना
C) साम्राज्य का विघटन और क्षेत्रीय शक्तियों का उदय
D) मौर्य वंश की पुनः स्थापना
व्याख्या: हर्षवर्धन की मृत्यु के बाद कोई सशक्त उत्तराधिकारी न होने के कारण उसका विशाल साम्राज्य बिखर गया। इसके बाद भारत में कई छोटे-छोटे राज्यों और राजाओं का उदय हुआ। यह काल “राज्य विघटन” और “राजनैतिक विखंडन” के रूप में जाना जाता है।
Q83. हर्षवर्धन के काल में निम्न में से कौन-सा विश्वविद्यालय प्रसिद्ध था?
A) नालंदा
B) विक्रमशिला
C) तक्षशिला
D) वल्लभी
व्याख्या: नालंदा विश्वविद्यालय हर्षवर्धन के काल में बौद्ध शिक्षा का प्रमुख केंद्र था। हर्ष ने इसे दान और संरक्षण प्रदान किया। ह्वेनसांग भी यहाँ अध्ययन करने आया था। यह विश्वविद्यालय विश्व का एक प्रमुख प्राचीन शैक्षणिक संस्थान माना जाता है।
Q84. ह्वेनसांग ने हर्षवर्धन के राज्य की राजधानी का क्या नाम लिखा है?
A) पाटलिपुत्र
B) उज्जैन
C) वाराणसी
D) कन्नौज
व्याख्या: ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा विवरण में हर्षवर्धन की राजधानी "कन्यकुब्ज" (अर्थात कन्नौज) को बताया है। यह नगर उस समय उत्तर भारत का प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक केंद्र बन गया था।
Q85. हर्षवर्धन की सबसे प्रसिद्ध जीवनी ‘हर्षचरित’ किस भाषा में लिखी गई?
A) संस्कृत
B) प्राकृत
C) पाली
D) अपभ्रंश
व्याख्या: बाणभट्ट द्वारा रचित ‘हर्षचरित’ संस्कृत भाषा में लिखी गई है। यह न केवल हर्षवर्धन की जीवनी है, बल्कि उस काल की सामाजिक, सांस्कृतिक, और राजनीतिक स्थिति का महत्वपूर्ण स्रोत भी है।
Q86. हर्षवर्धन ने निम्न में से किसे राजदूत के रूप में चीन भेजा था?
A) कुमारजीव
B) दिवाकर मित्र
C) नागार्जुन
D) वसुबंधु
व्याख्या: हर्षवर्धन ने अपने शासनकाल में दिवाकर मित्र को चीन के तांग सम्राट के दरबार में अपना राजदूत बनाकर भेजा था। इससे यह स्पष्ट होता है कि हर्षवर्धन की विदेश नीति कूटनीतिक और शांति प्रिय थी।
Q87. हर्षवर्धन के काल में किस महिला विदुषी का उल्लेख मिलता है?
A) गार्गी
B) मैत्रेयी
C) अवंतीसुंदरी
D) लोपामुद्रा
व्याख्या: ‘अवंतीसुंदरी कथा’ एक संस्कृत गद्य कृति है, जिसमें अवंतीसुंदरी नामक विदुषी नायिका का वर्णन है। माना जाता है कि यह कथा हर्षवर्धन काल में रची गई थी। इससे उस काल की महिलाओं की शिक्षा और बौद्धिक क्षमता का पता चलता है।
Q88. हर्षवर्धन के समय में कौन-सा धार्मिक ग्रंथ सबसे अधिक प्रभावशाली था?
A) ललितविस्तर
B) बृहत्संहिता
C) अर्थशास्त्र
D) मनुस्मृति
व्याख्या: 'ललितविस्तर' एक महायान बौद्ध ग्रंथ है जो उस समय काफी प्रसिद्ध था। हर्षवर्धन महायान परंपरा से प्रभावित था, और इस ग्रंथ में बुद्ध के जीवन और करुणा का वर्णन है। यह उस काल की धार्मिक भावनाओं का दर्पण है।
Q89. हर्षवर्धन के दरबार में “महासंधिविग्रहिक” कौन होता था?
A) राजस्व अधिकारी
B) धार्मिक प्रधान
C) न्यायालय प्रमुख
D) विदेश नीति और समझौतों का मंत्री
व्याख्या: “महासंधिविग्रहिक” का कार्य राज्य के अन्य राज्यों के साथ संबंध, संधियाँ, और कूटनीति संभालना था। यह मंत्री विदेश नीति का संचालन करता था, जैसा कि आधुनिक विदेश मंत्री करते हैं।
Q90. हर्षवर्धन के शासनकाल में बाणभट्ट के अतिरिक्त और कौन-से विद्वान थे?
A) मयूर और दिवाकर
B) भास और कालिदास
C) शूद्रक और पतंजलि
D) वराहमिहिर और चरक
व्याख्या: बाणभट्ट के अतिरिक्त हर्षवर्धन के दरबार में मयूर (कवि) और दिवाकर (विद्वान) जैसे प्रसिद्ध विद्वान थे। ये सभी विद्वान उस काल की साहित्यिक और सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाते हैं।
Q91. हर्षवर्धन की सैन्य असफलता किस नदी के पास हुई थी?
A) नर्मदा
B) गंगा
C) यमुना
D) गोदावरी
व्याख्या: हर्षवर्धन ने दक्षिण भारत पर अधिकार करने का प्रयास किया लेकिन चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के पास उसे पराजित किया। इस पराजय के बाद हर्षवर्धन का साम्राज्य उत्तर भारत तक ही सीमित रह गया।
Q92. हर्षवर्धन के काल में प्रमुख बंदरगाह कौन-सा था?
A) लोहगढ़
B) सूरत
C) ताम्रलिप्ति
D) मद्रास
व्याख्या: ताम्रलिप्ति बंगाल का एक प्रमुख बंदरगाह था जो हर्षवर्धन के काल में व्यापार और यातायात के लिए प्रसिद्ध था। यह स्थल पूर्वी एशिया के देशों से समुद्री व्यापार में सहायक था।
Q93. हर्षवर्धन के शासन काल का प्रमुख कर अधिकारी कौन कहलाता था?
A) भूमिकृद
B) महासंधिविग्रहिक
C) पुरोहित
D) महासेनापति
व्याख्या: भूमिकृद एक प्रमुख अधिकारी था जो भूमि कर एकत्र करने का कार्य करता था। हर्षवर्धन के प्रशासन में भूमि कर राज्य की आय का मुख्य स्रोत था, और इस कार्य को व्यवस्थित रूप से संचालित किया जाता था।
Q94. 'हर्षचरित' ग्रंथ की ऐतिहासिक प्रमाणिकता का मुख्य कारण क्या है?
A) यह एक धार्मिक ग्रंथ है
B) लेखक बाणभट्ट स्वयं दरबारी था
C) इसे बाद में लिखा गया
D) यह केवल कथा है
व्याख्या: 'हर्षचरित' की ऐतिहासिक प्रमाणिकता इसलिए मानी जाती है क्योंकि इसके लेखक बाणभट्ट स्वयं हर्षवर्धन के दरबारी कवि और जीवित समकालीन थे। उन्होंने प्रत्यक्ष अनुभवों के आधार पर घटनाओं का वर्णन किया।
Q95. हर्षवर्धन ने अपने शासनकाल में किस धार्मिक आयोजन में सम्पूर्ण कोष दान कर दिया था?
A) प्रयाग महोत्सव
B) काशी उत्सव
C) नालंदा समारोह
D) वैशाली सभा
व्याख्या: प्रयाग महोत्सव में हर्षवर्धन ने हर पाँच वर्ष में दान-पुण्य किया और अपने संपूर्ण कोष को धर्म, ब्राह्मणों और भिक्षुओं के लिए दान कर दिया। यह महादान उसकी धर्मनिष्ठा और दानशीलता का प्रतीक था।
Q96. ह्वेनसांग की पुस्तक का नाम क्या है जिसमें हर्षवर्धन का वर्णन मिलता है?
A) बोधिचर्यावतार
B) त्रिपिटक
C) मिलिंदपन्हा
D) सी-यू-की (Si-Yu-Ki)
व्याख्या: ह्वेनसांग ने अपनी यात्रा का विवरण “सी-यू-की” (Si-Yu-Ki / यात्रावृत्तांत) में लिखा है। इसमें उसने हर्षवर्धन के शासन, प्रशासन, समाज, धर्म और शिक्षा व्यवस्था का विस्तृत वर्णन किया है। यह ग्रंथ ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q97. हर्षवर्धन द्वारा रचित नाटक 'रत्नावली' का कथानक किस पर आधारित है?
A) युद्ध
B) प्रेम और हास्य
C) धार्मिक कथा
D) बौद्ध धर्म
व्याख्या: 'रत्नावली' एक सामाजिक नाटक है जिसमें प्रेम, हास्य और दरबारी जीवन की झलक मिलती है। यह राजा उदयन और रत्नावली की प्रेमकथा पर आधारित है। यह हर्षवर्धन की साहित्यिक प्रतिभा और रसबोध को दर्शाता है।
Q98. हर्षवर्धन के काल में सबसे बड़ी धर्मसभा कहाँ हुई थी?
A) कन्नौज
B) पाटलिपुत्र
C) वैशाली
D) नालंदा
व्याख्या: हर्षवर्धन ने कन्नौज में एक विशाल धर्मसभा का आयोजन किया था जिसमें ह्वेनसांग सहित अनेक विद्वान, भिक्षु और धर्माचार्य उपस्थित हुए थे। यह सभा बौद्ध धर्म के प्रचार में महत्वपूर्ण रही।
Q99. हर्षवर्धन के समय किस शिक्षा संस्थान को शाही संरक्षण प्राप्त था?
A) विक्रमशिला विश्वविद्यालय
B) तक्षशिला
C) नालंदा विश्वविद्यालय
D) वल्लभी
व्याख्या: नालंदा विश्वविद्यालय को हर्षवर्धन का शाही संरक्षण प्राप्त था। उसने नालंदा के लिए भूमि, धन और संसाधन दान किए। ह्वेनसांग स्वयं वहाँ कई वर्षों तक अध्ययन एवं अध्यापन करता रहा।
Q100. हर्षवर्धन की प्रमुख उपलब्धियों में कौन-सी बात नहीं आती?
A) दक्षिण भारत पर अधिकार
B) धर्मसभा का आयोजन
C) प्रयाग महादान
D) साहित्यिक रचनाएँ
व्याख्या: हर्षवर्धन ने दक्षिण भारत पर अधिकार करने की कोशिश की लेकिन वह असफल रहा। यह उसकी एक सीमा थी। अन्य उपलब्धियाँ जैसे धार्मिक आयोजन, दान, और साहित्यिक रचनाएँ उसकी शासनकाल की विशेषताएँ हैं।
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