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धातु युग mcQ
1. सिंधु घाटी सभ्यता किस युग से संबंधित मानी जाती है?
A) लौह युग
B) कांस्य युग
C) पाषाण युग
D) आधुनिक युग
व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता एक विशिष्ट कांस्य युगीन सभ्यता थी। इस युग में तांबा और टिन को मिलाकर कांस्य तैयार किया जाता था, जिससे औजार, हथियार और मूर्तियाँ बनाई जाती थीं। प्रसिद्ध "नर्तकी" की कांस्य प्रतिमा इस युग की उन्नत धातुकला का प्रमाण है।
2. मानव सभ्यता में सबसे पहले किस धातु का उपयोग किया गया?
A) लोहा
B) तांबा
C) सीसा
D) सोना
व्याख्या: तांबा (Copper) वह पहली धातु थी जिसका मानव ने उपयोग करना सीखा। इसका उपयोग मुख्यतः औजार, हथियार और बर्तन बनाने में किया जाता था। यह धातु प्राकृतिक रूप में भी मिल जाती थी, जिससे इसके उपयोग में आसानी हुई।
3. निम्न में से कौन-सी धातु कांस्य बनाने के लिए तांबे में मिलाई जाती थी?
A) चांदी
B) लोहा
C) टिन
D) सीसा
व्याख्या: कांस्य एक मिश्रधातु है जिसे तांबा (Copper) और टिन (Tin) को मिलाकर बनाया जाता है। कांस्य तांबे से अधिक कठोर और टिकाऊ होता है, जिससे इसका प्रयोग औजार, मूर्तियाँ और अस्त्र-शस्त्र बनाने में किया गया।
4. लौह युग की शुरुआत भारत में लगभग किस समय मानी जाती है?
A) 3500 ई.पू.
B) 1000 ई.पू.
C) 1500 ई.पू.
D) 500 ई.पू.
व्याख्या: भारत में लौह युग की शुरुआत लगभग 1000 ईसा पूर्व मानी जाती है। इस युग में लोहे से बने औजार और हथियार प्रचलित हुए जिससे कृषि और युद्ध दोनों में क्रांति आ गई। महाजनपद काल इसी युग में आता है।
5. निम्नलिखित में से किस सभ्यता को लौह युगीन सभ्यता माना जाता है?
A) मेसोपोटामिया
B) हड़प्पा
C) उत्तर वैदिक सभ्यता
D) मिस्र सभ्यता
व्याख्या: उत्तर वैदिक सभ्यता भारत की लौह युगीन सभ्यता है। इसमें लोहे के उपयोग के अनेक प्रमाण मिलते हैं, जैसे लोहे के हल, अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण। इस युग में सामाजिक और राजनैतिक संगठन भी अधिक विकसित हुए।
6. लौह युग में किस धातु का प्रयोग सामान्यतः औजार बनाने में किया जाता था?
A) लोहा
B) तांबा
C) कांसा
D) टिन
व्याख्या: लौह युग में औजार, अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरणों के निर्माण में लोहे का प्रयोग किया जाता था। लोहे की कठोरता और बहुउपयोगिता ने समाज को अधिक कुशल और उन्नत बनाया।
7. पाषाण युग और धातु युग के बीच की संक्रमणकालीन अवधि को क्या कहा जाता है?
A) आधुनिक युग
B) चाल्कोलिथिक युग
C) उत्तर वैदिक युग
D) निओलिथिक युग
व्याख्या: चाल्कोलिथिक युग (Chalcolithic Age) वह संक्रमणकाल था जब लोग पत्थर के साथ-साथ तांबे का भी प्रयोग करने लगे। यह युग धातु युग की ओर पहला कदम था और इसका स्थान पाषाण युग और कांस्य युग के बीच माना जाता है।
8. भारत में सबसे पुरानी चाल्कोलिथिक सभ्यता कौन-सी मानी जाती है?
A) आहड़ सभ्यता
B) मोहनजोदड़ो
C) काशी
D) वैशाली
व्याख्या: राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में स्थित आहड़ सभ्यता भारत की एक प्राचीन चाल्कोलिथिक सभ्यता मानी जाती है। यहाँ से तांबे के औजार, काले-लाल मृदभांड, और घरों के अवशेष मिले हैं जो इस सभ्यता की प्रगति को दर्शाते हैं।
9. लौह युग में प्रमुख कृषि औजार कौन-सा था?
A) फावड़ा
B) हल
C) कुदाल
D) दरांती
व्याख्या: लौह युग में लोहे से बने 'हल' का प्रयोग कृषि कार्यों में प्रमुखता से किया जाता था। इससे खेती अधिक प्रभावी और उपजाऊ हुई। वैदिक ग्रंथों में भी हल चलाने का उल्लेख मिलता है।
10. निम्न में से कौन-सा युग सीधे पाषाण युग के बाद आया?
A) लोहा युग
B) कांस्य युग
C) मध्यकाल
D) औपनिवेशिक युग
व्याख्या: पाषाण युग के बाद कांस्य युग आता है। इस युग में मानव ने धातुओं का उपयोग शुरू किया और कांस्य का आविष्कार एक बड़ी तकनीकी क्रांति थी जिसने सभ्यता को नई ऊँचाई दी।
11. भारत में लौह धातु के प्राचीनतम प्रमाण किस स्थान से प्राप्त हुए हैं?
A) आहड़
B) काशी
C) अतरंजीखेड़ा
D) मोहनजोदड़ो
व्याख्या: उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित अतरंजीखेड़ा से भारत में लौह धातु के सबसे पुराने प्रमाण मिले हैं। यहाँ से प्राप्त लौह औजार, हड्डियों के साथ पाए गए थे, जो लौह युग की तकनीकी प्रगति का संकेत देते हैं।
12. धातु युग में ‘नृप’ या राजा की शक्ति का मुख्य स्रोत क्या था?
A) सैन्य शक्ति और धन
B) आध्यात्मिक ज्ञान
C) पुरोहित वर्ग का समर्थन
D) कृषक समुदाय की सहमति
व्याख्या: धातु युग में ‘नृप’ या राजा की शक्ति का मुख्य आधार उसकी सैन्य शक्ति और संपत्ति होती थी। लोहे के अस्त्र-शस्त्र ने युद्धों को निर्णायक बना दिया था। इसके साथ ही अधिक भूमि पर नियंत्रण और कर वसूली भी सत्ता को मजबूत करते थे।
13. भारत के किस क्षेत्र में लोहे के औजारों से युक्त सबसे समृद्ध पुरातात्विक स्थल पाए गए हैं?
A) सिंधु क्षेत्र
B) उत्तर प्रदेश और बिहार
C) गुजरात और महाराष्ट्र
D) तमिलनाडु और केरल
व्याख्या: उत्तर प्रदेश और बिहार में कई ऐसे पुरातात्विक स्थल हैं जहाँ से लौह युगीन औजारों, खेती के उपकरणों और मकानों के प्रमाण मिले हैं। विशेषतः हसनपुर, अतरंजीखेड़ा, राजघाट आदि स्थल इस युग की समृद्धि को दर्शाते हैं।
14. धातु युग में सिक्कों का आरंभ किस युग से माना जाता है?
A) पाषाण युग
B) कांस्य युग
C) लौह युग
D) मध्यकाल
व्याख्या: लौह युग में ही सिक्कों का प्रचलन आरंभ हुआ। प्रारंभिक सिक्के पंचमार्क (छपा हुआ चिह्न) वाले होते थे जो मुख्यतः चांदी से बने होते थे। ये सिक्के व्यापारिक गतिविधियों के लिए प्रयोग में लाए जाते थे।
15. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थल चाल्कोलिथिक काल का उदाहरण है?
A) इनामगाँव
B) पाटलिपुत्र
C) विदिशा
D) वाराणसी
व्याख्या: इनामगाँव महाराष्ट्र का एक प्रमुख चाल्कोलिथिक स्थल है। यहाँ से तांबे के औजार, विशेष प्रकार की मृदभांड शैली और मकानों के अवशेष मिले हैं जो इस युग की जीवनशैली और तकनीक को दर्शाते हैं।
16. किस मिश्रधातु के प्रयोग से कांस्य युग की शुरुआत हुई?
A) तांबा और लोहा
B) तांबा और टिन
C) लोहा और टिन
D) तांबा और सीसा
व्याख्या: कांस्य एक मिश्रधातु है जो तांबा (Copper) और टिन (Tin) को मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु की कठोरता और टिकाऊपन के कारण इसका व्यापक उपयोग हुआ और यह एक नए युग की शुरुआत बना — कांस्य युग।
17. भारत में धातु युग के दौरान किस फसल की खेती व्यापक रूप से होने लगी?
A) धान
B) जौ
C) कपास
D) मक्का
व्याख्या: धातु युग, विशेषतः लौह युग में धान (चावल) की खेती का विकास हुआ। लोहे के हलों और औजारों ने खेती को सरल बनाया जिससे खाद्य उत्पादन में वृद्धि हुई और जनसंख्या भी बढ़ी।
18. लौह युग में सामाजिक व्यवस्था में किस वर्ग का उदय प्रमुख रूप से हुआ?
A) शूद्र
B) वैश्य
C) क्षत्रिय
D) ब्राह्मण
व्याख्या: लौह युग में जब राजनैतिक संगठन और युद्ध व्यवस्था विकसित हुई, तब क्षत्रिय वर्ग (योद्धा वर्ग) का प्रभाव बढ़ा। वे राज्य की सुरक्षा और विस्तार के लिए जिम्मेदार माने जाते थे।
19. निम्न में से कौन-सा युग धातु युग का हिस्सा नहीं है?
A) पुरापाषाण युग
B) कांस्य युग
C) चाल्कोलिथिक युग
D) लौह युग
व्याख्या: पुरापाषाण युग पूरी तरह से पत्थर पर आधारित था। यह मानव इतिहास का आदिम चरण था जिसमें धातु का कोई प्रयोग नहीं होता था। धातु युग इसकी समाप्ति के बाद आता है।
20. भारत में धातु युग के दौरान किस क्षेत्र में कृषि के लिए सबसे उपयुक्त परिस्थितियाँ थीं?
A) तटीय क्षेत्र
B) पश्चिमी भारत
C) गंगा-यमुना का दोआब
D) अरावली पर्वत क्षेत्र
व्याख्या: गंगा-यमुना का दोआब क्षेत्र अत्यंत उपजाऊ था, और लौह युग में लोहे के औजारों के प्रयोग से यहाँ कृषि का तीव्र विकास हुआ। यह क्षेत्र वैदिक सभ्यता के केंद्रों में से एक बना।
21. किस धातु को 'शुद्ध धातु' (Pure Metal) के रूप में जाना जाता है और धातु युग की शुरुआत इसी से मानी जाती है?
A) लोहा
B) तांबा
C) सीसा
D) टिन
व्याख्या: तांबा (Copper) प्राकृतिक रूप से उपलब्ध शुद्ध धातु है जिसे मानव ने सबसे पहले उपयोग किया। इसका गलनांक कम होने के कारण इसे पिघलाना और औजार बनाना आसान था। इसीलिए इसे धातु युग की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
22. किस भारतीय क्षेत्र में लौह धातु का सर्वाधिक उत्पादन प्राचीन काल से होता रहा है?
A) पंजाब
B) उत्तर प्रदेश
C) झारखंड
D) हरियाणा
व्याख्या: झारखंड और उससे सटे क्षेत्रों में लौह अयस्क की प्रचुरता है और यहाँ प्राचीन काल से ही लौह धातु का उत्पादन होता रहा है। खासकर आसुर जनजातियाँ लौह निर्माण में निपुण थीं।
23. धातु युग में किस तकनीकी विकास से कृषि में क्रांति आई?
A) पत्थर के औजार
B) मिट्टी के बर्तन
C) लोहे के हल और औजार
D) पशुपालन
व्याख्या: धातु युग, विशेषतः लौह युग में लोहे से बने हल और अन्य कृषि उपकरणों ने कृषि की उत्पादकता को बहुत बढ़ा दिया। यह तकनीकी प्रगति कृषि समाज की नींव बनी।
24. सिंधु घाटी की किस प्रसिद्ध मूर्ति को कांस्य धातु से बनाया गया था?
A) योग मुद्रा में पुरुष
B) नृत्य करती लड़की
C) हाथी की मूर्ति
D) बैल की मूर्ति
व्याख्या: ‘नृत्य करती लड़की’ (Dancing Girl) नामक प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमा मोहनजोदड़ो से मिली थी। यह मूर्ति धातु कला में सिंधु घाटी की दक्षता का प्रमाण है। इसे ‘लॉस्ट वैक्स टेक्निक’ द्वारा बनाया गया था।
25. किस तकनीक से सिंधु सभ्यता में धातु की मूर्तियाँ बनाई जाती थीं?
A) लॉस्ट वैक्स तकनीक
B) लकड़ी की नक्काशी
C) पिटवेल्डिंग
D) कोल्ड कैस्टिंग
व्याख्या: सिंधु सभ्यता में मूर्तियाँ बनाने के लिए ‘लॉस्ट वैक्स तकनीक’ (Lost Wax Technique) का उपयोग होता था। इसमें मोम की आकृति पर मिट्टी चढ़ाई जाती थी, फिर मोम को पिघलाकर उसमें पिघली हुई धातु डाली जाती थी।
26. ‘लौह युग’ शब्द का अर्थ क्या है?
A) जब मानव ने केवल पत्थरों का प्रयोग किया
B) जब मानव ने लोहे का प्रयोग औजारों में किया
C) जब मानव ने आग की खोज की
D) जब मानव ने कृषि शुरू की
व्याख्या: ‘लौह युग’ वह समय था जब मानव ने लोहे का उपयोग औजार, अस्त्र-शस्त्र और कृषि उपकरण बनाने में शुरू किया। यह युग पाषाण और कांस्य युग के बाद आया और समाज के विकास में निर्णायक रहा।
27. भारत में लौह युग की सबसे प्रमुख पुरातात्विक सभ्यता कौन-सी मानी जाती है?
A) पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) सभ्यता
B) आहड़ सभ्यता
C) सिंधु सभ्यता
D) चोल सभ्यता
व्याख्या: पेंटेड ग्रे वेयर (PGW) सभ्यता भारत की एक प्रमुख लौह युगीन सभ्यता है। यह गंगा-यमुना के दोआब क्षेत्र में फैली हुई थी और इससे जुड़ी संस्कृति में लोहे के औजार, चाक पर बने चित्रित मिट्टी के बर्तन मिलते हैं।
28. लौह युग में किस धातु के प्रयोग से सैन्य शक्ति में भारी वृद्धि हुई?
A) तांबा
B) टिन
C) लोहा
D) चांदी
व्याख्या: लोहे से बने अस्त्र-शस्त्र कांस्य की तुलना में अधिक मजबूत और धारदार होते थे। इससे युद्ध की तकनीक में भारी परिवर्तन आया और सैन्य शक्ति में क्रांतिकारी वृद्धि हुई।
29. किस धातु का प्रयोग मुद्राओं के निर्माण में प्राचीन भारत में सबसे पहले हुआ?
A) चांदी
B) तांबा
C) लोहा
D) सोना
व्याख्या: प्राचीन भारत में सबसे पहले पंचमार्क चांदी के सिक्के चलन में आए। इन पर विभिन्न प्रतीक जैसे सूरज, चंद्रमा, बैल आदि अंकित होते थे। इनका उपयोग व्यापार में किया जाता था।
30. धातु युग में सामाजिक असमानता का प्रारंभ किस कारण हुआ?
A) पत्थर के औजार
B) पशुपालन
C) अधिशेष उत्पादन और संपत्ति का संचय
D) वनवासियों का प्रवेश
व्याख्या: जब खेती और धातु युग में उत्पादन बढ़ा तो संपत्ति का संचय संभव हुआ। इससे समाज में वर्गों का जन्म हुआ – कुछ धनी, कुछ निर्धन। यही सामाजिक असमानता की शुरुआत थी।
31. भारत में ताम्रपाषाण काल (Chalcolithic Age) के लोग किस प्रकार के मकानों में रहते थे?
A) गुफाओं में
B) लकड़ी की झोपड़ियों में
C) मिट्टी और ईंटों से बने घरों में
D) पत्थर के महलों में
व्याख्या: ताम्रपाषाण काल के लोग मिट्टी, कच्ची ईंट और लकड़ी के संयोजन से बने घरों में रहते थे। यह समाज स्थायी बस्तियों में बसने लगा था और आवास निर्माण की कला विकसित होने लगी थी। मकान सामान्यतः वर्गाकार या आयताकार होते थे।
32. भारत में सबसे पहले ताम्रपाषाण युग की खोज किस स्थान पर हुई थी?
A) चिरांद
B) बालाथल
C) हड़प्पा
D) महिषादल
व्याख्या: राजस्थान में स्थित बालाथल स्थल से ताम्रपाषाण युग के प्रमुख प्रमाण मिले हैं। यहाँ से तांबे के औजार, लाल-कालें मृदभांड और मकानों के अवशेष मिले हैं, जो इस युग की संस्कृति को दर्शाते हैं।
33. ताम्रपाषाण काल की प्रमुख विशेषता क्या थी?
A) केवल पत्थर के औजारों का प्रयोग
B) तांबे और पत्थर दोनों का प्रयोग
C) केवल लौह औजारों का प्रयोग
D) केवल शिकार पर निर्भर जीवन
व्याख्या: ताम्रपाषाण काल की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इस युग के लोग तांबे और पत्थर दोनों का प्रयोग करते थे। यह एक संक्रमणकाल था जिसमें लोग पाषाण युग से धातु युग की ओर बढ़ रहे थे।
34. भारत में लोहे के सबसे पुराने उपकरण किस सभ्यता से संबंधित माने जाते हैं?
A) सिंधु सभ्यता
B) चाल्कोलिथिक सभ्यता
C) उत्तर वैदिक सभ्यता
D) मौर्यकालीन सभ्यता
व्याख्या: उत्तर वैदिक काल को भारत में लौह युग की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस काल में लोहे से बने हल, औजार और अस्त्र-शस्त्र मिले हैं। इससे कृषि, युद्ध और भवन निर्माण में व्यापक परिवर्तन आया।
35. किस सभ्यता में सबसे पहले तांबे की मुहरें और औजार प्राप्त हुए थे?
A) मेसोपोटामिया सभ्यता
B) वैदिक सभ्यता
C) सिंधु घाटी सभ्यता
D) मिस्र सभ्यता
व्याख्या: तांबे की मुहरों और औजारों के सबसे पुराने प्रमाण मेसोपोटामिया सभ्यता से प्राप्त हुए हैं। यह विश्व की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक थी और यहाँ धातुकर्म की कला प्रारंभिक अवस्था में अत्यधिक विकसित थी।
36. भारत में लोहे की प्राप्ति के सबसे पुराने प्रमाण किस काल से हैं?
A) पाषाण युग
B) उत्तर वैदिक काल
C) गुप्त काल
D) हड़प्पा काल
व्याख्या: उत्तर वैदिक काल में लोहे का व्यापक उपयोग आरंभ हुआ। ऋग्वैदिक काल में इसका कोई उल्लेख नहीं मिलता, पर उत्तर वैदिक ग्रंथों में 'श्याम आयस्' (काले धातु) का वर्णन मिलता है जो लोहा ही था।
37. निम्न में से किस क्षेत्र को भारत में ताम्रपाषाण सभ्यता का प्रमुख केंद्र नहीं माना जाता?
A) केरल
B) महाराष्ट्र
C) मध्य प्रदेश
D) राजस्थान
व्याख्या: भारत में केरल को ताम्रपाषाण सभ्यता का प्रमुख केंद्र नहीं माना जाता। इसके विपरीत महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अनेक चाल्कोलिथिक स्थल मिले हैं जैसे - इनामगाँव, नवदातोली, आहड़।
38. ‘श्याम आयस्’ शब्द का प्रयोग वैदिक ग्रंथों में किसके लिए किया गया है?
A) तांबा
B) लोहा
C) सोना
D) चांदी
व्याख्या: वैदिक ग्रंथों में ‘श्याम आयस्’ (black metal) शब्द का उल्लेख लोहे के लिए किया गया है। यह शब्द उत्तर वैदिक काल से जुड़ा है, जब लोहा प्रयोग में आने लगा था।
39. लौह युग के दौरान भारत में किस प्रकार के औजारों का निर्माण होता था?
A) केवल तांबे के औजार
B) केवल कांस्य के औजार
C) लोहे के मजबूत औजार
D) केवल पत्थर के औजार
व्याख्या: लौह युग में लोहे से बने औजारों जैसे हल, कुल्हाड़ी, भाले आदि का निर्माण बड़े पैमाने पर होता था। ये औजार तांबे व कांसे से अधिक मजबूत और टिकाऊ होते थे।
40. भारत के किस राज्य में लौह युग से संबंधित ‘पेंटेड ग्रे वेयर’ (PGW) संस्कृति के स्थल पाए गए हैं?
A) तमिलनाडु
B) गुजरात
C) उत्तर प्रदेश
D) ओडिशा
व्याख्या: उत्तर प्रदेश में लोहे युग से संबंधित पेंटेड ग्रे वेयर संस्कृति के कई स्थल मिले हैं जैसे हस्तिनापुर, अतरंजीखेड़ा। यह संस्कृति मुख्यतः गंगा-यमुना दोआब में पाई जाती है और लौह युग के विकास का संकेत देती है।
41. ताम्र युग के दौरान प्रमुख रूप से किस धातु का उपयोग औजारों और हथियारों के निर्माण में होता था?
A) लोहा
B) कांस्य
C) तांबा
D) सीसा
व्याख्या: ताम्र युग (Chalcolithic Age) वह काल था जब मनुष्य ने तांबे का प्रयोग करना शुरू किया लेकिन अभी तक लोहा प्रचलन में नहीं आया था। तांबा आसानी से गलाया जा सकता था और इससे औजार, बर्तन और हथियार बनाए जाते थे। तांबे का उपयोग मानव सभ्यता के लिए तकनीकी उन्नति का आरंभिक चरण था।
42. निम्न में से किस पुरातात्विक स्थल पर ताम्र युगीन संस्कृति के प्रमाण नहीं मिले हैं?
A) इनामगाँव
B) काशी
C) कायथा
D) अहार
व्याख्या: काशी एक धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल है, परंतु ताम्र युग की संस्कृति के स्पष्ट पुरातात्विक प्रमाण यहाँ नहीं मिले हैं। जबकि इनामगाँव, कायथा और अहार जैसे स्थल ताम्र युगीन सभ्यताओं के महत्वपूर्ण केंद्र थे, जहाँ तांबे के औजार, मृद्भांड और घरों के अवशेष मिले हैं।
43. अहार संस्कृति मुख्य रूप से किस राज्य में पाई जाती है?
A) बिहार
B) राजस्थान
C) गुजरात
D) मध्य प्रदेश
व्याख्या: अहार संस्कृति का मुख्य केंद्र राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित 'अहार' नामक स्थान है। इस संस्कृति के अंतर्गत लाल रंग के चित्रित मृद्भांड, तांबे के औजार, कृषि के प्रमाण, और मकानों के अवशेष मिले हैं। यह ताम्र युग की एक प्रमुख ग्रामीण सभ्यता थी।
44. लोहे की खोज ने किस काल की शुरुआत को चिह्नित किया?
A) कांस्य युग
B) लौह युग
C) नवपाषाण युग
D) ताम्र युग
व्याख्या: लौह युग (Iron Age) की शुरुआत उस समय मानी जाती है जब मनुष्य ने लोहे की खोज की और उसे औजारों और हथियारों में प्रयोग करना शुरू किया। इससे कृषि, युद्ध और निर्माण में क्रांति आ गई। भारत में लौह युग लगभग 1000 ई.पू. से शुरू माना जाता है।
45. दक्षिण भारत में लौह युगीन संस्कृतियों का एक प्रमुख पुरातात्विक साक्ष्य क्या है?
A) गुफाएं
B) महल
C) चित्रशिलाएं
D) मेगालिथिक समाधियाँ
व्याख्या: दक्षिण भारत में लौह युगीन संस्कृति का प्रमुख साक्ष्य मेगालिथिक (विशाल पत्थरों से बनी) समाधियाँ हैं। ये समाधियाँ मृतकों को दफनाने के लिए बनाई जाती थीं और इनमें लोहे के औजार, मिट्टी के बर्तन, गहने आदि भी मिलते हैं। ये उस समय की सामाजिक और धार्मिक मान्यताओं को दर्शाती हैं।
46. किस पुरातात्विक स्थल से लोहे की सबसे प्रारंभिक तिथि (1200 ई.पू. के आस-पास) प्राप्त हुई है?
A) हड़प्पा
B) मोहनजोदड़ो
C) इनामगाँव
D) आतरण्जिकेरा
व्याख्या: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में स्थित आतरण्जिकेरा से प्राप्त लौह सामग्री की रेडियोकार्बन डेटिंग के अनुसार यहाँ लगभग 1200 ई.पू. में लोहा प्रचलन में था। यह स्थल भारतीय उपमहाद्वीप में लौह युग की आरंभिक शुरुआत को दर्शाता है।
47. 'कयथा संस्कृति' का संबंध मुख्य रूप से किस राज्य से है?
A) मध्य प्रदेश
B) राजस्थान
C) उत्तर प्रदेश
D) महाराष्ट्र
व्याख्या: कयथा मध्य प्रदेश के उज्जैन ज़िले में स्थित एक पुरातात्विक स्थल है जहाँ ताम्र युगीन संस्कृति के प्रमाण मिले हैं। यहाँ से चित्रित मृद्भांड, तांबे के औजार और मकानों के अवशेष प्राप्त हुए हैं। यह स्थल मालवा क्षेत्र की ताम्र युगीन संस्कृति को दर्शाता है।
48. निम्नलिखित में से कौन-सा एक ताम्र युगीन स्थल है जो गोदावरी नदी के किनारे स्थित है?
A) कयथा
B) नेवासा
C) अतरंजीकेरा
D) चिरांद
व्याख्या: नेवासा महाराष्ट्र में स्थित है और यह गोदावरी नदी के तट पर बसा है। यहाँ से ताम्र युगीन संस्कृति के स्पष्ट प्रमाण मिले हैं, जैसे – तांबे के औजार, चित्रित मृद्भांड और कृषि संबंधी अवशेष। यह स्थल सभ्यता के जल-स्रोत केंद्रित विकास को भी दर्शाता है।
49. लौह युग में कृषि की तकनीकों में किस प्रकार का मुख्य परिवर्तन देखने को मिला?
A) कृषि का परित्याग
B) हल के उपयोग में लोहा
C) केवल जल पर निर्भरता
D) खेती का पूर्ण अंत
व्याख्या: लौह युग में लोहे से बने हल, फाल और अन्य कृषि उपकरणों का प्रयोग आरंभ हुआ, जिससे कठोर और शुष्क भूमि की जोताई संभव हुई। इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई और स्थायी बस्तियों का विकास हुआ।
50. भारतीय इतिहास में ‘मेगालिथिक संस्कृति’ किस युग की देन मानी जाती है?
A) पाषाण युग
B) लौह युग
C) कांस्य युग
D) ताम्र युग
व्याख्या: मेगालिथिक संस्कृति भारत में विशेष रूप से दक्षिण भारत में लौह युग के दौरान विकसित हुई। इसमें विशाल पत्थरों से बनी समाधियाँ (जैसे डोलमेन, टनल ग्रेव) पाई जाती हैं। यह संस्कृति सामाजिक व्यवस्था और मृतकों के प्रति श्रद्धा को भी दर्शाती है।
51. 'नर्तकी की मूर्ति' किस धातु से बनी थी?
A) लोहा
B) कांस्य
C) तांबा
D) पीतल
व्याख्या: 'नर्तकी की मूर्ति' सिंधु घाटी सभ्यता की सबसे प्रसिद्ध कांस्य प्रतिमाओं में से एक है, जिसे मोहनजोदड़ो से प्राप्त किया गया था। यह 10.8 सेमी ऊँची प्रतिमा है जो 'लॉस्ट वैक्स तकनीक' से बनाई गई थी, और यह उस युग की धातु-कला की उत्कृष्टता को दर्शाती है।
52. लोहे का प्रयोग भारत में सर्वप्रथम किस सभ्यता में देखा गया?
A) वैदिक सभ्यता
B) उत्तर वैदिक सभ्यता
C) सिंधु घाटी सभ्यता
D) चालकोलिथिक सभ्यता
व्याख्या: लोहे का प्रयोग भारत में उत्तर वैदिक काल (1000 ई.पू. के बाद) में आरंभ हुआ। इस काल में लोहे को "श्याम अयस" कहा गया। लोहे की कृषि उपकरणों से कृषि का विस्तार हुआ, और जनसंख्या वृद्धि हुई।
53. धातु युग की किस अवस्था में कृषि का तीव्र विकास हुआ?
A) लौह युग
B) कांस्य युग
C) ताम्र युग
D) पाषाण युग
व्याख्या: लौह युग में लोहे के हल, कुदाल जैसे कृषि उपकरणों के कारण कृषि में तीव्र प्रगति हुई। इससे surplus उत्पादन संभव हुआ, जो नगरों और राज्यों के विकास की नींव बना।
54. हड़प्पा काल में धातु के उपयोग से कौन सी विशेषता सामने आई?
A) लकड़ी की मूर्तियाँ
B) कांस्य प्रतिमाएँ
C) कपड़ा उद्योग
D) कागज का उपयोग
व्याख्या: हड़प्पा काल की प्रमुख विशेषताओं में से एक थी – धातु का प्रयोग विशेषकर कांस्य में। कांस्य से बनाई गई 'नर्तकी', पशुपति मुहर, औजार और बर्तन उस काल की धातु-कला को दर्शाते हैं।
55. निम्नलिखित में से कौन-सी सभ्यता "कांस्य युग" की श्रेणी में आती है?
A) वैदिक सभ्यता
B) मगध साम्राज्य
C) गुप्त काल
D) सिंधु घाटी सभ्यता
व्याख्या: सिंधु घाटी सभ्यता (2600–1900 ई.पू.) को कांस्य युगीन सभ्यता माना जाता है क्योंकि इस काल में तांबा और टिन को मिलाकर कांस्य धातु बनाई जाती थी और उसका उपयोग औजारों, मूर्तियों और बर्तनों में होता था।
56. लोहे से बने औजारों की खोज ने किस क्षेत्र में क्रांति लाई?
A) शिक्षा
B) व्यापार
C) कृषि
D) युद्ध
व्याख्या: लोहे से बने हल, फावड़े और अन्य कृषि उपकरणों ने भूमि जोतने, जंगल साफ करने और फसल उत्पादन बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। इससे समाज अधिक स्थायी और संगठित हुआ।
57. 'ताम्रपाषाण काल' का अर्थ क्या है?
A) तांबा और पत्थर दोनों का प्रयोग
B) केवल तांबे का युग
C) केवल पत्थर का युग
D) केवल लोहे का युग
व्याख्या: 'ताम्रपाषाण काल' (Chalcolithic Age) वह युग था जब मनुष्य ने पत्थर और तांबे दोनों का प्रयोग साथ-साथ किया। यह धातु युग की प्रारंभिक अवस्था मानी जाती है जो कांस्य युग की ओर संक्रमण का संकेत देती है।
58. लोहे के प्रयोग से भारत में कौन से राज्य का उत्थान हुआ?
A) गांधार
B) अवंति
C) मगध
D) कुरु
व्याख्या: मगध साम्राज्य के उत्थान में लोहे का बड़ा योगदान था। मगध क्षेत्र में 'लोहे की खदानें' थीं, जिससे मजबूत हथियार और कृषि उपकरण बने और सैन्य शक्ति तथा उत्पादन क्षमता बढ़ी।
59. निम्नलिखित में से कौन-सी तकनीक हड़प्पा काल की धातु-कला से जुड़ी है?
A) लॉस्ट वैक्स तकनीक
B) वेल्डिंग तकनीक
C) हॉट रोलिंग
D) इलेक्ट्रिक कास्टिंग
व्याख्या: हड़प्पा काल में कांस्य प्रतिमाएं 'लॉस्ट वैक्स तकनीक' (मोंट सिलिका पद्धति) से बनाई जाती थीं। इसमें मोम से मूर्ति बनाई जाती थी, फिर उस पर मिट्टी का लेप चढ़ाकर गर्म करने पर मोम पिघल जाता था, और उसमें धातु डालकर मूर्ति बनाई जाती थी।
60. 'धातु युग' के आरंभ से समाज में कौन-सी बड़ी विशेषता उभरी?
A) शिकारी जीवन शैली
B) सामाजिक वर्गों का विकास
C) खानाबदोश जीवन
D) गुफाओं में रहना
व्याख्या: धातु युग में कृषि, उत्पादन, शिल्प और व्यापार के विकास के साथ समाज में वर्ग भेद उभरा — जैसे शासक, योद्धा, कारीगर, किसान आदि। यही सामाजिक संरचना आगे चलकर वर्ण व्यवस्था का आधार बनी।
61. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थल ताम्र युगीन संस्कृति से संबंधित नहीं है?
A) कालीबंगा
B) भीमबेटका
C) आहाड़
D) मालवा
व्याख्या: भीमबेटका मध्य प्रदेश में स्थित प्रागैतिहासिक गुफा चित्रों का स्थल है जो मुख्यतः पाषाण युग से संबंधित है। जबकि आहाड़, मालवा और कालीबंगा ताम्रपाषाण युगीन संस्कृति से जुड़े हैं।
62. किस धातु के प्रयोग से मानव सभ्यता ने 'धातु युग' में प्रवेश किया?
A) लौह
B) तांबा
C) सोना
D) सीसा
व्याख्या: सबसे पहले तांबे (Copper) का प्रयोग मानव ने किया जिससे ताम्र युग की शुरुआत हुई। इसके बाद कांस्य और फिर लौह युग आया।
63. मेहरगढ़ स्थल से किस धातु का प्राचीनतम उपयोग पाया गया है?
A) लोहा
B) कांसा
C) तांबा
D) सीसा
व्याख्या: मेहरगढ़ (बलूचिस्तान, पाकिस्तान) में तांबे के उपयोग के प्रमाण मिलते हैं, जिससे यह स्थल भारत में धातु प्रयोग की प्रारंभिक अवस्थाओं का परिचायक है।
64. धातु युग में कृषि के लिए प्रयुक्त औजारों का निर्माण मुख्यतः किससे होता था?
A) तांबा और कांसा
B) लकड़ी
C) पत्थर
D) लोहा
व्याख्या: ताम्रपाषाण युग में कृषि उपकरण मुख्यतः तांबा और कांसा जैसी धातुओं से बनाए जाते थे, जिससे अधिक टिकाऊ और प्रभावी औजार संभव हुए।
65. प्रागैतिहासिक काल से ऐतिहासिक काल में परिवर्तन का एक मुख्य संकेतक क्या था?
A) कृषि की शुरुआत
B) बस्तियों का निर्माण
C) लेखन कला का विकास
D) शिकार और संग्रहण
व्याख्या: लेखन कला के विकास को इतिहासकार ऐतिहासिक युग की शुरुआत मानते हैं। इससे पूर्व का समय प्रागैतिहासिक कहलाता है।
66. आहाड़ संस्कृति मुख्यतः किस राज्य में पाई जाती है?
A) गुजरात
B) मध्य प्रदेश
C) महाराष्ट्र
D) राजस्थान
व्याख्या: आहाड़ संस्कृति राजस्थान के उदयपुर क्षेत्र में पाई गई है, जो ताम्र युग की प्रमुख संस्कृति थी। यहाँ से तांबे के औजार, मिट्टी के बर्तन आदि प्राप्त हुए हैं।
67. निम्नलिखित में से कौन-सा युग धातु युग का हिस्सा नहीं माना जाता?
A) कांस्य युग
B) लौह युग
C) मध्य पाषाण युग
D) ताम्र युग
व्याख्या: मध्य पाषाण युग (Mesolithic Age) एक पाषाण युग है, जो धातु युग से पूर्व आता है। धातु युग में ताम्र, कांस्य और लौह युग शामिल होते हैं।
68. लौह युग में किस प्रकार की सामाजिक संरचना का विकास हुआ?
A) जन और जनपद
B) खानाबदोश समूह
C) केवल परिवार
D) आदिम सामूहिक जीवन
व्याख्या: लौह युग में कृषि और स्थायी बस्तियों के विस्तार से जन (कबीला) और जनपद (क्षेत्रीय इकाई) जैसी राजनीतिक-सामाजिक संरचनाएँ विकसित हुईं।
69. दक्षिण भारत में 'मेगालिथ' किस काल से संबंधित हैं?
A) लौह युग
B) पाषाण युग
C) कांस्य युग
D) ताम्र युग
व्याख्या: मेगालिथिक (विशाल पत्थर आधारित) संरचनाएँ मुख्यतः दक्षिण भारत में लौह युग के दौरान बनाई गई थीं। ये समाधियाँ थीं जो मृतकों के सम्मान में बनाई जाती थीं।
70. भारत में सबसे पहले लोहे के प्रयोग के प्रमाण किस स्थल से प्राप्त हुए हैं?
A) अतरंजीखेड़ा
B) पैनासिया
C) हस्तिनापुर
D) चिरांद
व्याख्या: पैनासिया (उत्तर प्रदेश) से भारत में सबसे पहले लोहे के प्रयोग के प्रमाण प्राप्त हुए हैं, जिससे यह स्थल लौह युग की शुरुआत का सूचक बनता है।
71. निम्नलिखित में से किस स्थान से 'चरणपादक मृद्भांड' (Painted Grey Ware - PGW) प्राप्त हुए हैं?
A) महेंजोदड़ो
B) चिरांद
C) हस्तिनापुर
D) नागार्जुनकोंडा
व्याख्या: हस्तिनापुर से Painted Grey Ware (PGW) संस्कृति के मृद्भांड प्राप्त हुए हैं जो लौह युग की विशेषता है। यह संस्कृति महाभारत काल से जोड़ी जाती है और उत्तर भारत में विस्तारित थी।
72. निम्न में से कौन-सा लौह युगीन स्थल गंगा घाटी में स्थित है?
A) आहाड़
B) चिरांद
C) इंघावा
D) अतरंजीखेड़ा
व्याख्या: चिरांद बिहार में स्थित है और गंगा घाटी का प्रमुख लौह युगीन स्थल है। यहाँ से धातु उपकरण, पीजीडब्ल्यू मृद्भांड तथा अनाज संग्रह के प्रमाण मिलते हैं।
73. आहाड़ संस्कृति की प्रमुख विशेषता क्या थी?
A) पीतल का प्रयोग
B) रथों का प्रयोग
C) काली और लाल मृद्भांड
D) अश्वपालन
व्याख्या: आहाड़ संस्कृति की विशेषता इसके विशिष्ट काले और लाल मृद्भांड (Black and Red Ware) थे। यह संस्कृति राजस्थान में विकसित हुई और ताम्रपाषाण युग से संबंधित है।
74. लौह युग की शुरुआत भारत में लगभग कब मानी जाती है?
A) 3000 ईसा पूर्व
B) 2500 ईसा पूर्व
C) 1800 ईसा पूर्व
D) 1000 ईसा पूर्व
व्याख्या: भारत में लौह युग की शुरुआत लगभग 1000 ईसा पूर्व से मानी जाती है। इस काल में लोहे के औजारों, हथियारों और कृषि उपकरणों का प्रयोग आरंभ हुआ।
75. लोहे के प्रयोग से किस प्रमुख सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत हुई?
A) गो-पालन का विकास
B) स्थायी कृषि और राज्य व्यवस्था
C) शिकार की तीव्रता
D) गुफाओं का निर्माण
व्याख्या: लोहे के औजारों ने कृषि को अधिक सक्षम और तीव्र बनाया, जिससे स्थायी बस्तियों और अंततः राज्यों का विकास हुआ। यह वैदिक समाज में महत्वपूर्ण परिवर्तन लाया।
76. निम्नलिखित में से कौन-सी संस्कृति लौह युग से संबंधित नहीं है?
A) Painted Grey Ware (PGW)
B) Northern Black Polished Ware (NBPW)
C) हड़प्पा
D) Black and Red Ware
व्याख्या: हड़प्पा सभ्यता कांस्य युग से संबंधित है। जबकि PGW, NBPW, और Black and Red Ware संस्कृतियाँ लौह युग से संबंधित हैं।
77. 'Northern Black Polished Ware' किस काल में प्रमुख रूप से देखने को मिलता है?
A) हड़प्पा काल
B) मौर्य काल
C) उत्तर वैदिक काल
D) गुप्त काल
व्याख्या: Northern Black Polished Ware (NBPW) संस्कृति विशेषतः उत्तर वैदिक काल से संबंधित है, जो बाद में मौर्य काल तक विस्तारित हुई। यह समाज के परिष्कृत और नगरीय स्वरूप का संकेत देती है।
78. लौह युग में कृषि के विकास से किस प्रकार के समाज की स्थापना हुई?
A) वर्ण-आधारित समाज
B) शिकारी समाज
C) खानाबदोश समाज
D) मातृसत्तात्मक समाज
व्याख्या: कृषि, अधिशेष उत्पादन और कार्य विभाजन के साथ वर्ण व्यवस्था और सामाजिक श्रेणीकरण का विकास हुआ। उत्तर वैदिक समाज में यह प्रक्रिया तीव्र हुई।
79. लोहे के प्रयोग का पहला क्षेत्र भारत में मुख्यतः कहाँ था?
A) कर्नाटक
B) महाराष्ट्र
C) राजस्थान
D) उत्तर प्रदेश
व्याख्या: उत्तर प्रदेश के क्षेत्र विशेषतः पैनासिया, अतरंजीखेड़ा आदि में लोहे के सबसे प्राचीन प्रयोग के प्रमाण मिले हैं, जिससे यह क्षेत्र लौह युग के प्रारंभिक केंद्रों में शामिल है।
80. लौह युग की समाप्ति और ऐतिहासिक काल की शुरुआत किस तत्व से चिह्नित होती है?
A) ताम्र उपकरणों के बढ़ते प्रयोग से
B) जनजातीय संरचना से
C) लेखन प्रणाली के विकास से
D) धार्मिक कर्मकांड से
व्याख्या: ऐतिहासिक युग की शुरुआत लेखन प्रणाली (लिपि) के आगमन से मानी जाती है। इससे पहले के काल को प्रागैतिहासिक या पूर्व-ऐतिहासिक कहा जाता है।
81. अतरंजीखेड़ा स्थल किस युग से संबंधित है?
A) नवपाषाण युग
B) लौह युग
C) ताम्रपाषाण युग
D) सिंधु घाटी सभ्यता
व्याख्या: अतरंजीखेड़ा (उत्तर प्रदेश) लौह युग का प्रमुख पुरातात्विक स्थल है। यहाँ से लोहे के औजार, PGW मृद्भांड और ईंटों से बनी संरचनाएँ मिली हैं। यह उत्तर वैदिक संस्कृति से जुड़ा हुआ स्थल है।
82. निम्नलिखित में से कौन-सा मृद्भांड लौह युग में प्रचलित नहीं था?
A) Northern Black Polished Ware (NBPW)
B) चित्रित धूसर मृद्भांड (PGW)
C) हड़प्पाई मृद्भांड
D) Black and Red Ware
व्याख्या: हड़प्पाई मृद्भांड कांस्य युग की विशेषता हैं, जबकि PGW, NBPW और Black & Red Ware लौह युग से जुड़े हैं। अतः हड़प्पाई मृद्भांड लौह युग के नहीं माने जाते।
83. Painted Grey Ware संस्कृति को किस महाकाव्य से जोड़ा जाता है?
A) रामायण
B) महाभारत
C) वेद
D) जातक कथाएँ
व्याख्या: Painted Grey Ware (PGW) संस्कृति को महाभारत काल से जोड़ा जाता है। हस्तिनापुर, जो इस संस्कृति का एक प्रमुख स्थल है, को पांडवों की राजधानी कहा गया है।
84. लौह युग में 'जनपद' शब्द का क्या तात्पर्य था?
A) एक जाति विशेष
B) धार्मिक संस्था
C) भू-आधारित राजनीतिक इकाई
D) राजकीय सेना
व्याख्या: 'जनपद' शब्द लौह युग में एक भू-राजनीतिक इकाई को दर्शाता था, जिसका अर्थ है 'जन का पद' यानी वह क्षेत्र जहाँ एक जन या जनजाति स्थायी रूप से निवास करती थी।
85. Northern Black Polished Ware (NBPW) संस्कृति किस सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है?
A) नगरीकरण और व्यापार का विकास
B) गो-पालन की शुरुआत
C) मातृसत्ता की पुनर्स्थापना
D) ब्राह्मी लिपि का आविष्कार
व्याख्या: NBPW संस्कृति नगरीकरण, व्यापार, सामाजिक विषमता और राज्य व्यवस्था के विकास को दर्शाती है। यह संस्कृति मौर्य काल के नगरीय जीवन की पूर्वपीठिका मानी जाती है।
86. किस लौह युगीन स्थल से आरंभिक लौह उपकरणों के साथ-साथ लकड़ी की संरचनाओं के अवशेष भी मिले हैं?
A) राजघाट
B) अतरंजीखेड़ा
C) चिरांद
D) आहाड़
व्याख्या: अतरंजीखेड़ा से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों में लौह उपकरणों के साथ लकड़ी की संरचनाएँ भी मिली हैं, जो उस समय की वास्तुकला और आवासीय संरचनाओं को दर्शाती हैं।
87. लोहे के प्रयोग से कृषि पर क्या प्रभाव पड़ा?
A) कृषि का ह्रास
B) केवल सिंचाई का विकास
C) कृषि भूमि का विस्तार और उत्पादन में वृद्धि
D) केवल गायों की संख्या में वृद्धि
व्याख्या: लोहे के हल, कुदाल, फाल आदि औजारों के प्रयोग से कृषि भूमि की जोत और उत्पादन में वृद्धि हुई, जिससे अधिशेष उत्पादन और स्थायी समाज की स्थापना संभव हुई।
88. किस क्षेत्र को लौह युग का 'गंगायमुना दोआब' केन्द्र माना जाता है?
A) कर्नाटक
B) विदर्भ
C) पश्चिमी उत्तर प्रदेश
D) बिहार
व्याख्या: पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र, विशेषतः गंगायमुना दोआब, लौह युग की Painted Grey Ware संस्कृति और प्रारंभिक नगरीकरण का प्रमुख केन्द्र था।
89. लौह युग में किस नए धातु का व्यापक प्रयोग हुआ?
A) तांबा
B) लोहा
C) कांस्य
D) सोना
व्याख्या: लौह युग का नाम ही इस युग की प्रमुख धातु 'लोहे' पर आधारित है। लोहे के औजारों ने समाज, अर्थव्यवस्था, कृषि, युद्ध और नगरीकरण में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया।
90. भारतीय उपमहाद्वीप में लौह युग का सर्वप्रथम प्रमाण किस स्थल से मिला है?
A) चिरांद
B) अतरंजीखेड़ा
C) पैनासिया
D) राजघाट
व्याख्या: पैनासिया (उत्तर प्रदेश) से भारत में लौह युग के प्रारंभिक प्रमाण मिले हैं। यहाँ से 1000 ईसा पूर्व के लगभग लोहे के औजार प्राप्त हुए हैं, जो लौह युग के आरंभ को दर्शाते हैं।
91. 'राजघाट' स्थल किस नदी के तट पर स्थित लौह युगीन पुरास्थल है?
A) यमुना
B) गंगा
C) घाघरा
D) सरस्वती
व्याख्या: राजघाट उत्तर प्रदेश के वाराणसी के पास स्थित गंगा नदी के किनारे बसा लौह युगीन स्थल है। यहाँ से PGW एवं NBPW संस्कृति से संबंधित अनेक पुरावशेष प्राप्त हुए हैं।
92. चिरांद (बिहार) से लौह युगीन काल का कौन-सा प्रमुख अवशेष प्राप्त हुआ?
A) अशोक स्तंभ
B) लौह उपकरण और मृद्भांड
C) ब्राह्मी लिपि
D) मोहरें
व्याख्या: चिरांद, बिहार का एक महत्वपूर्ण स्थल है जहाँ लौह युग में उपयोग होने वाले लोहे के औजार, कृषि उपकरण, एवं Black-and-Red Ware मृद्भांड प्राप्त हुए हैं।
93. Painted Grey Ware (PGW) संस्कृति के लोग मुख्य रूप से किस कार्य में संलग्न थे?
A) कृषि एवं पशुपालन
B) व्यापार एवं समुद्र यात्रा
C) खनन
D) मूर्ति निर्माण
व्याख्या: PGW संस्कृति के लोग मुख्यतः कृषक और पशुपालक थे। इस काल में हल, फाल, हंसिया आदि लोहे के उपकरणों के प्रयोग से कृषि को नई दिशा मिली।
94. निम्नलिखित में से कौन-सा स्थल NBPW संस्कृति से संबद्ध नहीं है?
A) कौशाम्बी
B) अतरंजीखेड़ा
C) हड़प्पा
D) राजघाट
व्याख्या: हड़प्पा स्थल सिंधु घाटी सभ्यता (कांस्य युग) से जुड़ा है, न कि NBPW संस्कृति (लौह युग) से। NBPW संस्कृति का संबंध उत्तर भारत के नगरीकरण काल से है।
95. लौह युग में 'श्रमण' परंपरा का उदय किसका द्योतक था?
A) कृषि तकनीक का विकास
B) धार्मिक एवं दार्शनिक पुनरुत्थान
C) युद्ध कौशल का प्रसार
D) लिपि का विकास
व्याख्या: लौह युग में वर्ण-व्यवस्था के विरोध में श्रमण परंपरा (बौद्ध, जैन आदि) का विकास हुआ। इसने आत्म-नियंत्रण, तपस्या और वैदिक कर्मकांडों के विरोध को बढ़ावा दिया।
96. किस युग में पहली बार स्थायी बस्तियों में 'ईंट की दीवारों' का प्रयोग दिखता है?
A) नवपाषाण युग
B) ताम्रपाषाण युग
C) लौह युग
D) पाषाण युग
व्याख्या: लौह युग में स्थायी आवासों के निर्माण में ईंटों का व्यापक प्रयोग हुआ। यह स्थायित्व और नगरीकरण की दिशा में बड़ा कदम था, विशेषतः उत्तर भारत के नगरों में।
97. लौह युग में लोहे के औजारों का प्रयोग मुख्यतः किस क्षेत्र में हुआ?
A) बुनाई
B) नाव निर्माण
C) कृषि
D) भवन रंगाई
व्याख्या: लौह औजारों जैसे हल, फाल, हंसिया, कुदाल आदि ने कृषि को उन्नत बनाया। इससे जंगलों को काटकर भूमि साफ कर खेती संभव हुई और अन्न का अधिशेष उत्पन्न हुआ।
98. Painted Grey Ware संस्कृति के प्रमुख स्थल कौन-कौन से हैं?
A) हड़प्पा, मोहनजोदड़ो
B) कर्नूल, ब्रह्मगिरि
C) चिरांद, नेवासा
D) हस्तिनापुर, अतरंजीखेड़ा
व्याख्या: PGW संस्कृति के प्रमुख स्थल हैं – हस्तिनापुर, अतरंजीखेड़ा, अहिच्छत्र आदि। इन स्थलों से भूरे रंग पर काले रंग से चित्रित मृद्भांड मिले हैं।
99. NBPW संस्कृति का प्रमुख धातु कौन-सा था?
A) तांबा
B) कांस्य
C) चांदी
D) लोहा
व्याख्या: NBPW काल में लोहे का प्रयोग अत्यंत व्यापक हो गया था। इससे खेती, औजार निर्माण, शस्त्र निर्माण और नगरीकरण तीव्र गति से आगे बढ़ा।
100. किस क्षेत्र में लौह युग का प्रसार सबसे पहले हुआ था?
A) दक्षिण भारत
B) पूर्वोत्तर भारत
C) गंगा घाटी
D) सिंध क्षेत्र
व्याख्या: गंगा घाटी, विशेषतः पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बिहार, लौह युग के पहले क्षेत्र माने जाते हैं जहाँ 1000 ई.पू. के आस-पास लोहे के औजारों का प्रयोग प्रारंभ हुआ।
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