वैशेषिक दर्शन MCQ
Q1. वैशेषिक दर्शन के प्रवर्तक कौन माने जाते हैं?
B) पतंजलि
C) गौतम
A) कणाद
D) जैमिनि
व्याख्या: महर्षि कणाद को वैशेषिक दर्शन का प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने 'वैशेषिक सूत्र' की रचना की, जिसमें उन्होंने पदार्थ के ‘विशेष गुणों’ के आधार पर जगत की रचना का तात्त्विक विश्लेषण किया। ‘कणाद’ नाम इसलिए पड़ा क्योंकि वे ‘कण’ अर्थात अणु की सत्ता को ही जगत की मूलभूत रचना मानते थे। उनके अनुसार समस्त सृष्टि अणुओं से बनी है और यह अणु शाश्वत एवं अविभाज्य हैं। उनकी विचारधारा भारतीय परमाणुवाद (Indian Atomism) का प्रारंभिक रूप है।
Q2. वैशेषिक दर्शन में कितने पदार्थों को स्वीकार किया गया है?
A) 5
B) 6
C) 7
D) 9
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन ने संसार के तत्वों को छह मूल वर्गों में बाँटा है जिन्हें 'षट् पदार्थ' कहा गया है — (1) द्रव्य (Substance), (2) गुण (Quality), (3) कर्म (Action), (4) सामान्य (Generality), (5) विशेष (Particularity), और (6) समवाय (Inherence)। इन छह पदार्थों के माध्यम से ही विश्व के समस्त तत्वों की व्याख्या की जाती है। वैशेषिक का अर्थ ही है — 'विशेषताओं का दर्शन'। यह दर्शन उन विशेषताओं को पहचानने और वर्गीकृत करने का प्रयास करता है जो पदार्थ को उसकी प्रकृति और कार्य से अलग करती हैं।
Q3. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘द्रव्य’ का क्या अर्थ है?
B) केवल ठोस वस्तुएँ
C) केवल पदार्थ जो दिखे
A) वह जो गुण और कर्म का आधार हो
D) केवल चेतन तत्व
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘द्रव्य’ का अर्थ है — वह तत्व जिसमें गुण और कर्म अधिष्ठित रहते हैं। इसे गुण और क्रिया का आश्रय कहा गया है। उदाहरण के लिए — पृथ्वी में गंध (गुण) और गति (कर्म) दोनों मौजूद हैं। बिना द्रव्य के गुण और कर्म की सत्ता नहीं हो सकती। वैशेषिक में नौ द्रव्यों को स्वीकार किया गया है: पृथ्वी, जल, तेज (अग्नि), वायु, आकाश, काल, दिशा, आत्मा और मन। ये सभी ब्रह्माण्ड की विभिन्न क्रियाओं के मूल आधार हैं।
Q4. वैशेषिक दर्शन में कितने प्रकार के द्रव्यों की पहचान की गई है?
A) 5
B) 6
C) 9
D) 12
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन के अनुसार द्रव्य कुल 9 प्रकार के हैं –
1. पृथ्वी (गंध सहित),
2. जल (रस सहित),
3. अग्नि (रूप सहित),
4. वायु (स्पर्श सहित),
5. आकाश (शब्द सहित),
6. काल (समय की धारणा),
7. दिशा (स्थान संबंधी विवेचन),
8. आत्मा (चेतना का आधार),
9. मन (सूक्ष्म इन्द्रिय)।
ये सभी द्रव्य संपूर्ण विश्व की भौतिक और आध्यात्मिक रचना के मूल आधार हैं।
1. पृथ्वी (गंध सहित),
2. जल (रस सहित),
3. अग्नि (रूप सहित),
4. वायु (स्पर्श सहित),
5. आकाश (शब्द सहित),
6. काल (समय की धारणा),
7. दिशा (स्थान संबंधी विवेचन),
8. आत्मा (चेतना का आधार),
9. मन (सूक्ष्म इन्द्रिय)।
ये सभी द्रव्य संपूर्ण विश्व की भौतिक और आध्यात्मिक रचना के मूल आधार हैं।
Q5. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार का दर्शन है?
A) भौतिकतावादी
B) योगप्रधान
C) वेदान्तप्रधान
D) कर्मकाण्डप्रधान
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन को 'भौतिकतावादी' दर्शन कहा जा सकता है क्योंकि यह जगत की रचना, कार्य और विनाश को भौतिक पदार्थों की विशेषताओं से जोड़कर देखता है। यह परमाणुवाद (Atomism) पर आधारित है। इसमें आत्मा और मोक्ष को भी माना गया है, परंतु प्राथमिक दृष्टि से यह एक विज्ञानपरक और तात्त्विक विश्लेषणात्मक प्रणाली है जो अनुभव और तर्क पर आधारित है।
Q6. वैशेषिक दर्शन किस दर्शन से घनिष्ठ रूप से जुड़ा है?
A) सांख्य
B) योग
C) न्याय
D) वेदान्त
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन न्याय दर्शन से अत्यंत घनिष्ठ रूप से संबंधित है। न्याय दर्शन ज्ञान के स्रोतों (प्रमाणों) पर केंद्रित है, जबकि वैशेषिक पदार्थों और उनके गुणों पर। दोनों दर्शन अंततः आत्मा की मुक्ति को ही लक्ष्य मानते हैं। कालांतर में इन दोनों दर्शनों को 'न्याय-वैशेषिक' के रूप में एकीकृत रूप में भी पढ़ाया गया क्योंकि इनके तात्त्विक सिद्धांत और दृष्टिकोण एक-दूसरे के पूरक हैं।
Q7. वैशेषिक दर्शन के अनुसार 'गुण' किसे कहते हैं?
B) जो कार्य करता है
C) चेतना
D) अणु
A) वह जो द्रव्य में होकर भी कर्म न करे
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘गुण’ उस तत्व को कहा गया है जो स्वयं किसी क्रिया में भाग नहीं लेता, लेकिन किसी द्रव्य में स्थित होता है और उसे विशेष बनाता है। जैसे – रस, रूप, गंध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विबाग आदि। बिना द्रव्य के गुण की कोई स्वतंत्र सत्ता नहीं होती। उदाहरण: दूध (द्रव्य) का सफेद रंग (गुण)।
Q8. 'समवाय' का क्या अर्थ है वैशेषिक दर्शन में?
A) अस्थायी संबंध
B) मनोभाव
C) अभिन्न और अविनाशी संबंध
D) स्वतंत्र सत्ता
व्याख्या: समवाय वह शाश्वत संबंध है जो दो अविभाज्य तत्वों के बीच होता है और जिसे पृथक नहीं किया जा सकता। जैसे – धागे और कपड़े के बीच का संबंध, लकड़ी और मेज के बीच का संबंध, शब्द और आकाश का संबंध। यह केवल द्रव्य और गुण, द्रव्य और कर्म के बीच ही नहीं बल्कि अणुओं के योग, पदार्थ और उसके अंगों के बीच भी पाया जाता है।
Q9. वैशेषिक दर्शन में ज्ञान प्राप्ति का प्रमुख साधन क्या है?
A) उपमा
B) प्रत्यक्ष और अनुमान
C) शब्द और अनुमान
D) शब्द और उपमान
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन के अनुसार ज्ञान की प्राप्ति दो प्रमुख प्रमाणों द्वारा होती है —
1. **प्रत्यक्ष**: पाँच इन्द्रियों द्वारा प्राप्त सीधा अनुभव (Perception)।
2. **अनुमान**: तर्क के द्वारा किसी तथ्य की पुष्टि करना (Inference)।
यह दर्शन शब्द (शास्त्र) या उपमा (सादृश्य) जैसे प्रमाणों को प्राथमिक नहीं मानता। ज्ञान का लक्ष्य आत्मा की यथार्थ पहचान और मुक्ति है।
1. **प्रत्यक्ष**: पाँच इन्द्रियों द्वारा प्राप्त सीधा अनुभव (Perception)।
2. **अनुमान**: तर्क के द्वारा किसी तथ्य की पुष्टि करना (Inference)।
यह दर्शन शब्द (शास्त्र) या उपमा (सादृश्य) जैसे प्रमाणों को प्राथमिक नहीं मानता। ज्ञान का लक्ष्य आत्मा की यथार्थ पहचान और मुक्ति है।
Q10. वैशेषिक दर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A) मोक्ष के लिए पूजा
B) कर्मकाण्ड की पूर्ति
C) ज्ञान के द्वारा मोक्ष की प्राप्ति
D) योग द्वारा समाधि
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन का अंतिम लक्ष्य ‘मोक्ष’ की प्राप्ति है, जो केवल तत्वों की सही जानकारी (तत्त्वज्ञान) से संभव है। यह दर्शन मानता है कि जब आत्मा पदार्थों के सही स्वभाव को जान लेती है और उनसे संबंध तोड़ देती है, तब वह बंधन से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त होती है। यह मोक्ष न तो पूजा से, न ही कर्मकांड से, बल्कि तात्त्विक विवेचन और विवेकपूर्ण ज्ञान से मिलता है।
Q11. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘कर्म’ किसे कहा जाता है?
A) द्रव्य में स्थित गति या क्रिया
B) पुण्य और पाप
C) केवल शारीरिक गतिविधि
D) यज्ञ और पूजा
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘कर्म’ का अर्थ है — द्रव्य में होने वाली गति या कोई भी क्रिया। यह ‘क्रिया’ पांच प्रकार की बताई गई है: 1) उत्क्षेपण (ऊपर की ओर गति), 2) अपक्षेपण (नीचे की ओर गति), 3) आकुञ्चन (सिकुड़ना), 4) प्रसारण (फैलना), 5) गमन (चलना)। यह कर्म आत्मा या मन का कार्य नहीं है, बल्कि वह है जो द्रव्य में होता है और जिसके कारण परिवर्तन होते हैं।
Q12. वैशेषिक के अनुसार 'सामान्य' (सामान्यता) का क्या अर्थ है?
A) साधारण विचार
B) एक ही जाति का तत्त्व जो अनेक में विद्यमान हो
C) बार-बार घटने वाली घटना
D) सर्वसामान्य सिद्धांत
व्याख्या: 'सामान्य' का अर्थ है — वह तत्त्व जो अनेक व्यक्तियों या वस्तुओं में एक समान रूप से विद्यमान होता है। जैसे — ‘घट’ और ‘पात्र’ दोनों में ‘मिट्टी’ का सामान्य तत्त्व होता है। यह वर्ग या जाति को सूचित करता है। वैशेषिक दर्शन में सामान्य की सत्ता को स्वीकार कर उसे एक स्वतंत्र तत्त्व के रूप में मान्यता दी गई है जो प्रत्येक वस्तु को उसकी जाति के साथ जोड़ता है।
Q13. वैशेषिक दर्शन में ‘विशेष’ शब्द का क्या तात्पर्य है?
A) वह तत्त्व जो प्रत्येक वस्तु को अन्य से भिन्न बनाता है
B) विशिष्ट गुण
C) विशेष वर्ग
D) कोई विश्लेषण
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘विशेष’ वह तत्त्व है जो किसी वस्तु को अन्य सभी से अलग बनाता है। उदाहरणस्वरूप, दो आत्माएँ एक ही द्रव्य वर्ग की होते हुए भी विशिष्ट (अलग) होती हैं — इसका कारण ‘विशेष’ है। यह परमाणु, आत्मा, काल आदि शाश्वत द्रव्यों में विद्यमान होता है और उन्हें पहचान योग्य बनाता है।
Q14. वैशेषिक दर्शन में 'मन' को किस प्रकार का द्रव्य माना गया है?
A) स्थूल और बहुगुणी
B) सर्वव्यापी
C) परमाणुवादी और अणुरूप
D) चेतना का स्वरूप
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'मन' को एक सूक्ष्म परमाणुवादी द्रव्य माना गया है जो आत्मा से भिन्न है। यह अति लघु होता है, इसलिए एक समय में केवल एक विषय का ग्रहण कर सकता है। यही कारण है कि हम एक साथ दो वस्तुओं पर ध्यान नहीं दे सकते। मन ही इन्द्रियों और आत्मा के बीच संपर्क स्थापित करता है।
Q15. वैशेषिक दर्शन के अनुसार आत्मा का लक्षण क्या है?
A) ज्ञान का आश्रय
B) शरीर में रहने वाला तत्व
C) इन्द्रिय
D) मन की क्रिया
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन आत्मा को एक स्वतंत्र द्रव्य मानता है जो ज्ञान, इच्छा, द्वेष आदि मानसिक क्रियाओं का आश्रय है। आत्मा नित्य, व्यापक और चेतन होती है, लेकिन वह बिना शरीर के कार्य नहीं कर सकती। ज्ञान का उदय आत्मा, मन और इन्द्रियों के संयोजन से होता है।
Q16. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ज्ञान की उत्पत्ति कब होती है?
A) केवल ध्यान से
B) जब आत्मा, मन, इन्द्रियाँ और विषय संपर्क में आते हैं
C) जब पूजा की जाती है
D) केवल अनुभव से
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन के अनुसार ज्ञान की उत्पत्ति तब होती है जब आत्मा, मन, इन्द्रियाँ और विषय — ये चारों एक साथ संपर्क में आते हैं। उदाहरण के लिए — जब नेत्र (इन्द्रिय) किसी वस्तु को देखता है, मन उस पर ध्यान देता है और आत्मा से संपर्क होता है — तभी दृश्य ज्ञान उत्पन्न होता है। यह एक जटिल परंतु वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
Q17. वैशेषिक के अनुसार ‘मोक्ष’ की स्थिति कैसी होती है?
A) दुःख की पूर्ण निवृत्ति और गुण-कर्म का अभाव
B) स्वर्ग की प्राप्ति
C) केवल जन्म-मृत्यु से मुक्ति
D) ध्यान में स्थित रहना
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘मोक्ष’ वह अवस्था है जिसमें आत्मा के सभी गुण (इच्छा, द्वेष, सुख-दुःख आदि) और कर्म का पूर्ण अभाव हो जाता है। आत्मा तब अपनी शुद्ध और स्थायी स्थिति में स्थित हो जाती है। यह एक निश्चल, निर्लेप और शाश्वत अवस्था है जिसमें पुनर्जन्म नहीं होता और न कोई मनोविकार।
Q18. वैशेषिक दर्शन में 'समवाय' संबंध का उदाहरण क्या है?
B) पिता-पुत्र का संबंध
A) कपड़े में धागों का संबंध
C) दो मित्रों का संबंध
D) देश-काल का संबंध
व्याख्या: ‘समवाय’ संबंध वह है जो अभिन्न होता है और उसे पृथक नहीं किया जा सकता। कपड़ा और उसके धागे का संबंध ऐसा ही है — धागे को हटा दें तो कपड़ा नहीं रह जाता। यह संबंध द्रव्य और गुण, परमाणु और समष्टि, शब्द और आकाश आदि के बीच भी होता है।
Q19. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार का प्रमाण नहीं मानता?
A) प्रत्यक्ष
B) अनुमान
C) उपमान
D) अनुभव
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन केवल दो प्रमाणों को मानता है — प्रत्यक्ष (Perception) और अनुमान (Inference)। उपमान (सादृश्य से ज्ञान) और शब्द (श्रुति) को यह दर्शन प्रमाण नहीं मानता क्योंकि यह तर्क और अनुभव पर आधारित दर्शन है। इसका दृष्टिकोण वैज्ञानिक और यथार्थवादी है।
Q20. वैशेषिक दर्शन का दर्शन किस भाषा में मूलतः उपलब्ध है?
B) पालि
A) संस्कृत
C) प्राकृत
D) हिंदी
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन का मूल ग्रंथ ‘वैशेषिक सूत्र’ महर्षि कणाद द्वारा संस्कृत में रचित है। बाद में इस पर अनेक भाष्य भी संस्कृत में ही लिखे गए जैसे — पृथ्वीराज, श्रीधर, चन्द्रानन्द आदि के। यह दर्शाता है कि भारतीय दर्शन की प्राचीन परंपरा में संस्कृत भाषा का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।
Q21. वैशेषिक दर्शन में आत्मा को किस प्रकार का द्रव्य माना गया है?
A) नित्य, व्यापक और चेतन
B) विनाशी और गतिशील
C) स्थूल और दृश्य
D) पंचमहाभूतों से बना हुआ
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन आत्मा को एक नित्य (शाश्वत), सर्वव्यापी (सभी जगह विद्यमान) और चेतन द्रव्य मानता है। यह आत्मा शरीर में रहती है लेकिन शरीर से भिन्न होती है। आत्मा ज्ञान, इच्छा, द्वेष, सुख-दुःख जैसे मनोविकारों का आधार होती है। जब आत्मा कर्मों से बंध जाती है, तो जन्म-मृत्यु का चक्र चलता है, और जब कर्म समाप्त हो जाते हैं, तब आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है।
Q22. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘काल’ क्या है?
B) एक कल्पना मात्र
C) मन की धारणा
D) गति का परिणाम
A) एक द्रव्य जो गति और परिवर्तन का कारण है
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘काल’ को एक स्वतंत्र द्रव्य माना गया है जो गति, परिवर्तन, उत्पत्ति, विनाश आदि घटनाओं की व्यवस्था करता है। काल के कारण ही हम पहले और बाद की धारणा बना पाते हैं। यह नित्य, अव्यक्त और अनादि है। यदि काल न हो तो न घटनाओं का क्रम समझा जा सकता है, न ही कार्य-कारण संबंध।
Q23. वैशेषिक दर्शन में 'दिशा' को किस प्रकार परिभाषित किया गया है?
B) पृथ्वी का कोण
C) गति की दिशा
A) स्थान विशेष को सूचित करने वाला नित्य द्रव्य
D) स्थान परिवर्तन की विधि
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में दिशा को एक स्वतंत्र द्रव्य माना गया है जो किसी वस्तु के स्थान को अन्य वस्तुओं से संबंधित करके स्पष्ट करता है। जैसे - पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ऊपर, नीचे आदि। यदि दिशा न हो, तो कोई स्थान विशेष नहीं बताया जा सकता। इसलिए दिशा का अस्तित्व ब्रह्माण्ड की संरचना को समझने में अनिवार्य है।
Q24. वैशेषिक दर्शन के अनुसार 'गुण' की संख्या कितनी मानी गई है?
A) 10
B) 20
C) 24
D) 12
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में कुल 24 गुणों को मान्यता दी गई है। इनमें प्रमुख हैं: रूप, रस, गंध, स्पर्श, संख्या, परिमाण, पृथक्त्व, संयोग, विकल्प, बुद्धि, सुख, दुःख, इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, धर्म, अधर्म, गुरुत्व, द्रवत्व, स्निग्धता, संख्यान, परत्व, अपरत्व, और शब्द। ये सभी किसी न किसी द्रव्य में ही स्थित होते हैं और उन्हें पहचाने योग्य बनाते हैं।
Q25. वैशेषिक में किस द्रव्य में 'शब्द' गुण माना गया है?
A) आकाश
B) वायु
C) अग्नि
D) मन
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ‘शब्द’ (ध्वनि) को केवल ‘आकाश’ द्रव्य का गुण माना गया है। ध्वनि की उत्पत्ति कंपन से होती है और वह आकाश में ही संचरित होती है। जैसे स्पर्श वायु का गुण है, वैसे ही शब्द केवल आकाश का गुण है। यदि आकाश न हो, तो ध्वनि का संचरण असंभव हो जाता है।
Q26. वैशेषिक में ‘संयोग’ किसे कहा जाता है?
B) भावनात्मक जुड़ाव
A) दो या अधिक द्रव्यों का संपर्क
C) ज्ञान का परिणाम
D) विचारों का मिलन
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'संयोग' का अर्थ है — जब दो द्रव्य एक-दूसरे के इतने निकट आ जाएँ कि उनके गुण और क्रियाओं में पारस्परिक प्रभाव पड़े। उदाहरण: हाथ और कलम का संयोग, आँख और वस्तु का संयोग। यह संयोग ही ज्ञान और क्रिया की संभावनाओं का द्वार खोलता है।
Q27. वैशेषिक के अनुसार 'विभाग' किसे कहते हैं?
A) पूर्व संयोग का अभाव
B) कोई विशेष विभाग
C) ज्ञान की एक अवस्था
D) विशेष प्रकार की गति
व्याख्या: ‘विभाग’ वैशेषिक में वह स्थिति है जब पहले जो द्रव्य संयोग में थे, अब वह संयोग नहीं रह गया हो। यानी दो वस्तुओं का अलग हो जाना ही विभाग कहलाता है। जैसे हाथ से कलम को छोड़ देना — पहले संयोग था, अब विभाग हो गया। यह भी एक गुण माना गया है।
Q28. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘अविभाज्य परमाणु’ किसका मूल है?
B) केवल वायु का
C) केवल आत्मा का
A) समस्त द्रव्य पदार्थों का
D) केवल आकाश का
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में परमाणु को पदार्थों की सबसे सूक्ष्म और अविभाज्य इकाई माना गया है। पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु — ये चार द्रव्य परमाणुओं से बने होते हैं। प्रत्येक का परमाणु अलग गुण वाला होता है। यही परमाणु जब संयोग करते हैं, तब दृश्य पदार्थ बनते हैं।
Q29. वैशेषिक में ‘अभ्युदय’ और ‘निःश्रेयस’ किसका संकेत देते हैं?
A) आर्थिक उन्नति
B) लौकिक और पारलौकिक कल्याण
C) धर्म और अर्थ
D) राजनीति और मोक्ष
व्याख्या: ‘अभ्युदय’ का अर्थ है — लौकिक सुख, समृद्धि और सफलता। ‘निःश्रेयस’ का अर्थ है — मोक्ष या परम कल्याण। वैशेषिक दर्शन का उद्देश्य है — अभ्युदय और निःश्रेयस की प्राप्ति ज्ञान द्वारा। इसका अर्थ है – व्यक्ति को इस लोक में सुख और परलोक में मोक्ष दोनों मिलें।
Q30. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार की पद्धति पर आधारित है?
A) तर्क और निरीक्षण आधारित विश्लेषण
B) केवल वेदों की व्याख्या
C) आस्तिक भावनाओं पर आधारित
D) मंत्र और यज्ञ आधारित
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन एक विश्लेषणात्मक और तात्त्विक प्रणाली है जो तर्क (logic), निरीक्षण (observation), और अनुभव (experience) पर आधारित है। यह पदार्थों की गहराई से विवेचना करता है और उनके गुणों, कारणों और संबंधों को स्पष्ट करता है। यह दर्शन वैज्ञानिक पद्धति का प्रारंभिक रूप माना जा सकता है।
Q31. वैशेषिक दर्शन के अनुसार 'गुण' और 'कर्म' में क्या अंतर है?
B) दोनों समान हैं
C) गुण दृश्य होते हैं, कर्म अदृश्य
D) गुण द्रव्य से स्वतंत्र होते हैं
A) गुण स्थायी होते हैं, कर्म अस्थायी और गतिशील
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'गुण' और 'कर्म' दोनों को द्रव्य में स्थित माना गया है, परन्तु अंतर यह है कि **गुण स्थायी और परिवर्तनशील नहीं होते** (जैसे रंग, स्वाद आदि), जबकि **कर्म अस्थायी और गतिशील होते हैं** (जैसे चलना, उठना आदि)। कर्म के कारण ही पदार्थों में गति होती है।
Q32. वैशेषिक दर्शन में ‘प्रमेय’ किसे कहते हैं?
B) प्रमाण देने वाला
C) केवल आत्मा
A) वह वस्तु जो ज्ञान का विषय बने
D) शब्द
व्याख्या: प्रमेय वह वस्तु है जिसे जाना जाता है, जो ज्ञान का विषय होती है। वैशेषिक में छह प्रमेयों को माना गया है: द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, और समवाय। ज्ञान की प्रक्रिया में प्रमेय का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि वही तत्त्व अनुभूति का केंद्र होता है।
Q33. वैशेषिक में द्रव्य कितने प्रकार के माने गए हैं?
A) चार
B) सात
C) नौ
D) दस
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **नौ प्रकार के द्रव्यों** को माना गया है: 1) पृथ्वी, 2) जल, 3) अग्नि, 4) वायु, 5) आकाश, 6) काल, 7) दिशा, 8) आत्मा, और 9) मन। ये सभी स्वतंत्र अस्तित्व वाले माने गए हैं और प्रत्येक में कोई न कोई विशेष गुण विद्यमान होता है।
Q34. वैशेषिक दर्शन में 'समवाय' संबंध की कितनी विशेषता मानी गई है?
B) यह अस्थायी संबंध है
C) यह केवल मानसिक कल्पना है
D) यह चेतना का संबंध है
A) यह अविच्छिन्न और अविनाशी संबंध है
व्याख्या: 'समवाय' एक **अविच्छिन्न, नित्य और अपरिवर्तनीय** संबंध है, जैसे — धागे और कपड़े में, परमाणु और रूप में। यह ऐसा संबंध है जिसमें एक को हटाने पर दूसरा भी नहीं रह सकता। वैशेषिक में इसे प्रमुख संबंध के रूप में मान्यता दी गई है।
Q35. वैशेषिक दर्शन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
A) यज्ञ करना
B) मोक्ष की प्राप्ति हेतु तत्वज्ञान प्राप्त करना
C) स्वर्ग की प्राप्ति
D) सिद्धियाँ प्राप्त करना
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन का मूल उद्देश्य है — **निःश्रेयस (मोक्ष)** की प्राप्ति। इसके लिए वह ज्ञान को साधन मानता है। वस्तुओं का यथार्थ ज्ञान ही व्यक्ति को सुख-दुःख के कारणों से मुक्त कर सकता है। इसीलिए यह दर्शन तर्क और विश्लेषण पर आधारित है।
Q36. वैशेषिक दर्शन में 'परत्व' और 'अपरत्व' किस गुण से संबंधित हैं?
A) रूप
B) समय और स्थान की तुलना
C) धर्म
D) वाणी
व्याख्या: 'परत्व' (before) और 'अपरत्व' (after) वे गुण हैं जो समय और स्थान के सापेक्ष वस्तुओं की स्थिति को दर्शाते हैं। जैसे — एक वस्तु दूसरी की तुलना में आगे या पीछे है, पहले या बाद में है। वैशेषिक दर्शन में यह भी स्वतंत्र गुण के रूप में मान्य है।
Q37. वैशेषिक में किसको 'कारण' नहीं माना जाता?
A) समवाय कारण
B) अभाव
C) असंयोग कारण
D) निमित्त कारण
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में अभाव (अस्तित्व का अभाव) को **कारण नहीं** माना गया है, क्योंकि अभाव में सृजन की कोई शक्ति नहीं होती। कारण वही हो सकता है जिसमें परिणाम उत्पन्न करने की सामर्थ्य हो, जैसे — निमित्त (औजार), समवाय (सन्निहित द्रव्य) आदि।
Q38. वैशेषिक दर्शन में 'अनुभव' किस प्रकार का प्रमाण है?
A) प्रत्यक्ष प्रमाण
B) अनुमान
C) शब्द
D) उपमान
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन ‘अनुभव’ को प्रत्यक्ष ज्ञान का स्वरूप मानता है। जब इन्द्रिय, मन, आत्मा और विषय एक साथ संपर्क में आते हैं तब जो ज्ञान होता है वही अनुभव कहलाता है। यह प्रत्यक्ष प्रमाण का ही भाग है।
Q39. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘धर्म’ का तात्पर्य क्या है?
B) यज्ञ एवं कर्मकांड
C) पूजा-पाठ
A) वह जो सुख और मोक्ष का साधन हो
D) सामाजिक कर्तव्य
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में धर्म को एक गुण माना गया है जो सुख और मोक्ष की प्राप्ति में सहायक होता है। यह केवल कर्मकांड नहीं बल्कि आचरण, सोच और व्यवहार का तत्त्व है। धर्म आत्मा का विशेष गुण है जो पुनर्जन्म और मोक्ष को प्रभावित करता है।
Q40. वैशेषिक दर्शन की पद्धति को क्या कहा जाता है?
B) कल्पनात्मक संकल्पवाद
C) प्रतीकात्मक अभिव्यक्तिवाद
D) आध्यात्मिक अध्यासवाद
A) विश्लेषणात्मक यथार्थवाद (Analytical Realism)
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन एक यथार्थवादी (Realist) दर्शन है जो विश्लेषण की पद्धति अपनाता है। यह पदार्थों और उनके गुणों का निरीक्षण कर विश्लेषण करता है और वास्तविकता के पीछे छिपे तत्वों को समझने का प्रयास करता है।
Q41. वैशेषिक दर्शन में 'प्राप्ति' का क्या अर्थ है?
A) किसी वस्तु का अपने आश्रय में स्थित होना
B) किसी वस्तु की प्राप्ति से आनंद
C) व्यापार में लाभ
D) कोई अनौपचारिक संबंध
व्याख्या: 'प्राप्ति' वैशेषिक में एक विशेष प्रकार का संबंध है जिसमें कोई गुण, क्रिया या विशेष किसी द्रव्य में अवस्थित होता है। जैसे— रंग का कपड़े में होना, या गंध का पुष्प में होना। यह संबंध समवाय संबंध से अलग होता है क्योंकि यह गुण या धर्म का संबंध है, न कि द्रव्य का।
Q42. वैशेषिक दर्शन में 'अभाव' को किस रूप में स्वीकार किया गया है?
B) केवल मानसिक स्थिति
A) एक विशेष तत्त्व के रूप में
C) भ्रम
D) कल्पना
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'अभाव' को यथार्थ (real) माना गया है और इसे चार प्रकारों में बाँटा गया है — 1) पूर्वाभाव, 2) प्रत्याभाव, 3) अन्योन्याभाव, 4) प्रध्वंसाभाव। यह नकारात्मक तथ्यों को समझने के लिए आवश्यक माना गया है, जैसे - “इस मेज पर कलम नहीं है” — यह भी एक यथार्थ अनुभव है।
Q43. वैशेषिक के अनुसार 'नित्य' वस्तु कौन सी होती है?
B) जो बार-बार जन्म लेती है
C) जिसका आकार बड़ा हो
D) जो अदृश्य हो
A) जो न कभी उत्पन्न होती है न नष्ट होती है
व्याख्या: 'नित्य' वस्तु वह होती है जो सदा से है और सदा तक रहेगी। वैशेषिक दर्शन में आकाश, काल, दिशा, आत्मा, मन और परमाणु को नित्य माना गया है। ये कभी उत्पन्न नहीं होते, नष्ट नहीं होते — बस, परिवर्तन इन पर लागू नहीं होता।
Q44. वैशेषिक के अनुसार 'अनित्य' वस्तु कौन-सी होती है?
A) जो उत्पन्न होती है और नष्ट भी होती है
B) जो अदृश्य हो
C) जो नित्य दृष्टिगोचर न हो
D) जिसका कोई कारण न हो
व्याख्या: 'अनित्य' वस्तुएँ वे होती हैं जो कारणों के प्रभाव से उत्पन्न होती हैं और काल के प्रभाव से नष्ट हो जाती हैं। जैसे—घट (मिट्टी का बर्तन), मकान, शरीर आदि। इनके बनने और नष्ट होने के पीछे कोई-न-कोई कारण अवश्य होता है।
Q45. वैशेषिक के अनुसार ‘शब्द’ किस कारण उत्पन्न होता है?
B) अग्नि के ताप से
C) मन के संकल्प से
A) वायु के कंपन से
D) आत्मा की इच्छा से
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन के अनुसार शब्द का मूल कारण वायु का कंपन (vibration) है। जब वायु किसी वस्तु से टकराती है तो ध्वनि उत्पन्न होती है और वह आकाश में संचारित होती है। इस कारण 'आकाश' को 'शब्द' का आधार भी माना गया है।
Q46. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘शब्द’ को कितने रूपों में बाँटा गया है?
A) दो – वर्ण और वाक्य
B) तीन – ध्वनि, भाष्य, वर्ण
C) केवल एक – ध्वनि
D) चार – श्रुति, स्मृति, संहिता, अनुष्ठान
व्याख्या: वैशेषिक में 'शब्द' को दो भागों में बाँटा गया है — (1) वर्ण: जो किसी एक ध्वनि को दर्शाता है, जैसे – 'क', 'प', 'म' आदि; (2) वाक्य: जिसमें कई वर्ण मिलकर कोई अर्थ प्रदान करते हैं। यह भाषिक विश्लेषण की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
Q47. वैशेषिक दर्शन के किस द्रव्य में सभी गुणों की संभावना होती है?
B) आकाश
C) वायु
A) पृथ्वी
D) अग्नि
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **पृथ्वी** को ऐसा द्रव्य माना गया है जिसमें रूप, रस, गंध, स्पर्श — सभी गुण विद्यमान होते हैं। अन्य द्रव्यों में ये गुण सीमित होते हैं, जैसे — वायु में केवल स्पर्श, आकाश में केवल शब्द। इसलिए पृथ्वी को पूर्ण गुणधारी माना गया है।
Q48. वैशेषिक के अनुसार कौन-सा द्रव्य 'संख्यात्मक भेद' को दर्शाता है?
A) संख्या
B) गुण
C) आत्मा
D) परमाणु
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **संख्या (संख्यान)** को एक गुण माना गया है जो संख्यात्मक भिन्नता को दर्शाता है — जैसे एक, दो, अनेक। इससे यह निर्धारित होता है कि किसी विशेष प्रकार का गुण या द्रव्य एक है या अनेक।
Q49. वैशेषिक दर्शन के अनुसार 'आत्मा' और 'मन' में क्या अंतर है?
B) दोनों समान हैं
C) मन सर्वव्यापक, आत्मा सीमित
D) आत्मा दृश्य, मन अदृश्य
A) आत्मा चेतन, नित्य है; मन सूक्ष्म, अचेतन
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **आत्मा** को चेतन, व्यापक और नित्य माना गया है, जबकि **मन** को अति-सूक्ष्म, अचेतन और परमाणुवादी। मन की सहायता के बिना आत्मा ज्ञान नहीं प्राप्त कर सकती। मन एक समय में एक विषय पर ही केंद्रित हो सकता है।
Q50. वैशेषिक दर्शन में ‘संसार बंधन’ का मूल कारण क्या है?
B) ईश्वर का निर्णय
A) अविद्या और कर्म
C) मन की चंचलता
D) इन्द्रिय सुख
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन के अनुसार आत्मा का संसार में बंधन **अविद्या (अज्ञान)** और **कर्म** के कारण होता है। जब तक जीव को तत्वों का यथार्थ ज्ञान नहीं होता, वह इच्छाओं, द्वेष, सुख-दुख आदि में फंसा रहता है। ज्ञान ही मोक्ष का साधन है।
Q51. वैशेषिक दर्शन में 'न्याय' के साथ उसका संबंध किस रूप में बताया गया है?
B) दोनों विपरीत दर्शन हैं
C) न्याय केवल कर्मकांड पर आधारित है
A) न्याय वैशेषिक का पूरक है
D) वैशेषिक न्याय का ही विस्तार है
व्याख्या: वैशेषिक और न्याय दर्शन दोनों को 'न्याय-वैशेषिक' के नाम से जोड़ा जाता है। न्याय दर्शन प्रमाणों और तर्क की प्रणाली देता है, जबकि वैशेषिक दर्शन पदार्थों और उनके गुणों की तात्त्विक विवेचना करता है। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं और मोक्ष के लिए यथार्थ ज्ञान पर बल देते हैं।
Q52. वैशेषिक दर्शन में 'विशेष' किसे कहते हैं?
B) आत्मा की इच्छा
A) परमाणुओं की पहचान कराने वाला लक्षण
C) गुण का रूप
D) कोई इन्द्रिय
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'विशेष' को ऐसी तत्त्वगत विशेषता माना गया है जो प्रत्येक परमाणु, आत्मा, मन आदि को अन्य से अलग पहचान देती है। इसी विशेष तत्व के कारण हर आत्मा अलग, हर परमाणु अलग होता है। इसे 'अतिसूक्ष्म सत्ता' माना गया है।
Q53. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ‘समान्य’ का क्या अर्थ है?
A) वह तत्व जो अनेक वस्तुओं में एक सा होता है
B) जो एक ही वस्तु में बार-बार आता है
C) इन्द्रिय का गुण
D) विशेषता का रूप
व्याख्या: 'सामान्य' वैशेषिक का एक प्रमुख तत्त्व है जो **एक से अधिक द्रव्यों में समान रूप से विद्यमान रहता है**, जैसे - 'घटत्व', 'वृक्षत्व', 'मनुष्यत्व' आदि। यह वस्तुओं को वर्गीकृत करने का आधार है और पदार्थों की एकरूपता को स्पष्ट करता है।
Q54. वैशेषिक के अनुसार किसमें ‘समवाय संबंध’ नहीं होता?
B) गुण और द्रव्य
C) क्रिया और द्रव्य
D) परमाणु और पदार्थ
A) आत्मा और शरीर
व्याख्या: आत्मा और शरीर के बीच **संयोग संबंध** होता है, **समवाय नहीं**। समवाय एक अविच्छिन्न और नित्य संबंध होता है, जैसे — गुण और द्रव्य के बीच। आत्मा का शरीर में निवास स्थायी नहीं होता, अतः वह समवाय के अंतर्गत नहीं आता।
Q55. वैशेषिक दर्शन में 'प्रमाण' की संख्या कितनी मानी गई है?
A) दो
B) चार
C) छह
D) एक
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में केवल **दो प्रमाणों** को मान्यता दी गई है — (1) प्रत्यक्ष (Perception), (2) अनुमान (Inference)। इसके अनुसार यही दो प्रमाण यथार्थ ज्ञान के लिए पर्याप्त हैं। शब्द, उपमान, अर्थापत्ति आदि प्रमाणों को इसमें नहीं स्वीकारा गया।
Q56. वैशेषिक के अनुसार 'मन' कैसा द्रव्य है?
B) अनेक, चेतन
C) सर्वव्यापक
A) एक, परमाणुवत, अचेतन
D) असत
व्याख्या: मन को वैशेषिक दर्शन में **अत्यंत सूक्ष्म, परमाणुवत, अचेतन** द्रव्य माना गया है। इसका कार्य आत्मा और इन्द्रियों के बीच समन्वय करना है। मन एक बार में एक ही विषय को ग्रहण कर सकता है, इसीलिए हम एक समय में एक ही विचार पर केंद्रित हो पाते हैं।
Q57. वैशेषिक दर्शन में 'कर्म' का उद्देश्य क्या है?
B) पुण्य अर्जन
A) गति और परिवर्तन को उत्पन्न करना
C) आत्मा का ज्ञान देना
D) संयोग का कारण बनना
व्याख्या: 'कर्म' वैशेषिक दर्शन में द्रव्य का वह गुण है जो **गति और परिवर्तन का कारण बनता है**। जैसे - ऊपर उठना, नीचे गिरना, सिकुड़ना, फैलना आदि। कर्म के कारण ही संयोग और विभाग संभव होता है।
Q58. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार के पदार्थों को 'द्रव्य' मानता है?
A) वे जो गुण और कर्म का आधार बनते हैं
B) जो केवल स्थूल हों
C) जो इन्द्रियों से देखे जा सकें
D) केवल पंचमहाभूत
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **द्रव्य को वह आधार** माना गया है जिसमें **गुण और कर्म विद्यमान होते हैं**। द्रव्य अपने आप में स्वतंत्र सत्ता है और समस्त पदार्थ जगत का मूल कारण है। इसमें स्थूल, सूक्ष्म, दृश्य और अदृश्य सभी प्रकार के तत्त्व आते हैं।
Q59. वैशेषिक दर्शन में ‘संयोग’ और ‘विभाग’ का क्या महत्व है?
B) केवल मनोवैज्ञानिक स्थिति
C) केवल आत्मा में घटने वाली घटनाएँ
D) असत्य धारणाएँ
A) ज्ञान, गति और क्रिया का आधार
व्याख्या: 'संयोग' और 'विभाग' के बिना ज्ञान, गति और अन्य क्रियाएँ संभव नहीं हैं। जब इन्द्रियाँ विषय से संयोग करती हैं तब ज्ञान उत्पन्न होता है, और विभाग से गति शुरू होती है। अतः इन दोनों की तात्त्विक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Q60. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार का दर्शन है?
B) केवल वेद आधारित
A) तात्त्विक यथार्थवाद (Metaphysical Realism)
C) कर्मकांड प्रधान
D) सृजनवादी
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन को **तात्त्विक यथार्थवाद (Metaphysical Realism)** कहा जाता है क्योंकि यह जगत की वस्तुओं, गुणों, द्रव्यों, क्रियाओं और उनके संबंधों को **तर्क, निरीक्षण और विश्लेषण** के माध्यम से जानने का प्रयास करता है। यह ज्ञान के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने में सहायक है।
Q61. वैशेषिक दर्शन में ‘काल’ किसका कारक है?
A) उत्तरपूर्वता और परोवर्तिता का
B) गति और संयोग का
C) केवल कर्म का
D) आकाश का
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **‘काल’ (समय)** को नित्य द्रव्य माना गया है, जो घटनाओं की **उत्तरपूर्वता (before) और परोवर्तिता (after)** को निर्धारित करता है। बिना काल के घटनाओं का क्रम समझना असंभव होता है। अतः यह तत्त्वगत व्यवस्था का आधार है।
Q62. वैशेषिक में 'दिशा' का क्या कार्य माना गया है?
B) गति को उत्पन्न करना
C) आत्मा का मार्ग बताना
A) स्थानगत भेद को जानना
D) क्रिया को सीमित करना
व्याख्या: 'दिशा' वैशेषिक में एक नित्य द्रव्य है जो वस्तुओं के बीच **स्थानगत भेद** को स्पष्ट करता है, जैसे – पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण आदि। दिशा के बिना हम वस्तुओं की स्थापन या स्थिति का ज्ञान नहीं कर सकते।
Q63. वैशेषिक दर्शन में कौन-सा तत्त्व 'एकत्व' और 'अनेकत्व' को बताता है?
B) विशेष
A) संख्यान
C) धर्म
D) समवाय
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **‘संख्यान’ (संख्या)** को गुण माना गया है जो यह दर्शाता है कि कोई वस्तु **एक** है, **दो** है या **अनेक**। इससे पदार्थों की गिनती, भिन्नता और विश्लेषण संभव होता है। यह सामान्य अनुभवों का तात्त्विक आधार है।
Q64. वैशेषिक दर्शन में ‘द्रव्य’ को किस दृष्टिकोण से देखा गया है?
A) गुण और क्रिया का आश्रय
B) ज्ञान का उत्पादक
C) आत्मा का रूप
D) काल का रूप
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **द्रव्य को वह आधार** माना गया है जिसमें **गुण और क्रिया** का अस्तित्व होता है। बिना द्रव्य के कोई भी गुण या कर्म नहीं रह सकता। उदाहरणतः – रंग, गंध, गति आदि सभी द्रव्य में ही रहते हैं।
Q65. वैशेषिक में 'प्रमाण' का मुख्य लक्ष्य क्या है?
B) कर्म सिद्धि
C) वाणी की सिद्धि
A) यथार्थ ज्ञान की प्राप्ति
D) बहस में जीत
व्याख्या: वैशेषिक में ‘प्रमाण’ का उद्देश्य है — **यथार्थ ज्ञान प्राप्त करना**, क्योंकि मोक्ष के लिए तत्वों की सच्चाई को जानना आवश्यक है। गलत ज्ञान (अविद्या) ही बंधन का कारण है, और प्रमाण उसका निवारण करता है।
Q66. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार की पद्धति पर आधारित है?
A) विश्लेषणात्मक (Analytical)
B) कल्पनात्मक
C) उपासना आधारित
D) योग साधना पर आधारित
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन विश्लेषण की पद्धति पर आधारित है। यह पदार्थों को उनके अवयवों में विभाजित कर समझता है, जैसे — द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय आदि। इस विश्लेषण से जगत का यथार्थ ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है।
Q67. वैशेषिक में परमाणु का स्वरूप क्या माना गया है?
B) दृश्य, नश्वर
C) चेतन
D) अवास्तविक
A) अणुवत, नित्य, अविभाज्य
व्याख्या: वैशेषिक में परमाणु को **नित्य (eternal), अविभाज्य और अणुवत** माना गया है। यह प्रत्येक भौतिक पदार्थ का अंतिम घटक होता है, जो स्वतः न दिखाई देता है, परंतु उसके संयोग से दृश्य वस्तुएँ बनती हैं।
Q68. वैशेषिक दर्शन में 'ईश्वर' की मान्यता कैसी है?
B) जगत का भौतिक कारण
A) कर्ता, नियंता, लेकिन साक्षी
C) केवल उपासना का केंद्र
D) नास्तिक दृष्टिकोण
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन **ईश्वर को सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान और जगत का नियामक (governor)** मानता है, परंतु वह **भौतिक कारण नहीं** है। वह साक्षी की तरह कर्मफल प्रदान करता है, परंतु संसार के रचयिता के रूप में नहीं प्रस्तुत होता।
Q69. वैशेषिक के अनुसार 'सुख-दुख' का कारण क्या है?
A) आत्मा के गुण रूप धर्म
B) इन्द्रियों का दोष
C) शरीर की प्रकृति
D) काल की गति
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **सुख और दुख को आत्मा के गुण** के रूप में देखा गया है। आत्मा में इनका अनुभव होता है, परंतु ये आत्मा के स्थायी गुण नहीं हैं। यह अनुभव कर्म और इन्द्रिय विषय संयोग पर निर्भर होता है।
Q70. वैशेषिक दर्शन में 'मोक्ष' की प्राप्ति कैसे होती है?
B) यज्ञ और उपासना से
C) व्रत और तप से
A) तत्वों के यथार्थ ज्ञान से
D) ईश्वर की कृपा से
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में मोक्ष की प्राप्ति का एकमात्र उपाय है — **तत्वों का यथार्थ ज्ञान**। जब आत्मा तत्वों को पहचान लेती है, और अज्ञान व विकार से मुक्त हो जाती है, तब वह पुनर्जन्म से मुक्त हो मोक्ष को प्राप्त करती है।
Q71. वैशेषिक दर्शन के अनुसार 'गति' का मुख्य कारण क्या है?
B) मन
C) इन्द्रियाँ
A) कर्म
D) आत्मा
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में गति (motion) का मुख्य कारण 'कर्म' को माना गया है। कर्म एक गुण है जो द्रव्य में परिवर्तन या गति उत्पन्न करता है। इसके बिना कोई भी स्थान परिवर्तन संभव नहीं है। गति के पाँच भेद माने गए हैं – उत्क्षेपण, अध:क्षेपण, आकुंचन, प्रसारण और गमन।
Q72. वैशेषिक दर्शन में 'रूप' को किसका गुण माना गया है?
A) पृथ्वी और अग्नि
B) आकाश और वायु
C) जल और मन
D) आत्मा और काल
व्याख्या: वैशेषिक में 'रूप' को एक गुण के रूप में स्वीकार किया गया है जो मुख्यतः **पृथ्वी और अग्नि** में पाया जाता है। रूप अर्थात् रंग – जैसे श्वेत, कृष्ण, पीत आदि। पृथ्वी में रूप के अतिरिक्त रस, गंध और स्पर्श भी होते हैं, जबकि अग्नि में केवल रूप होता है।
Q73. वैशेषिक दर्शन में 'परमाणु' की संख्या कितनी प्रकार की मानी गई है?
B) पाँच
C) दो
D) एक
A) चार
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन के अनुसार **चार प्रकार के परमाणु** होते हैं — पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु के परमाणु। आकाश, काल, दिशा, आत्मा और मन नित्य द्रव्य हैं लेकिन उनके परमाणु नहीं माने जाते। प्रत्येक परमाणु अदृश्य, अविभाज्य और नित्य होता है।
Q74. वैशेषिक के अनुसार ‘शब्द’ किसका गुण है?
B) वायु
A) आकाश
C) अग्नि
D) जल
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'शब्द' को **आकाश का गुण** माना गया है। आकाश ही वह माध्यम है जिसके कारण शब्द का संचार होता है। जब वायु की गति किसी वस्तु से टकराती है, तब ध्वनि उत्पन्न होती है और वह आकाश में फैलती है।
Q75. वैशेषिक दर्शन में 'गंध' किसका गुण माना गया है?
A) पृथ्वी
B) जल
C) अग्नि
D) वायु
व्याख्या: वैशेषिक में 'गंध' को केवल **पृथ्वी का गुण** माना गया है। यह विशेषता अन्य द्रव्यों में नहीं पाई जाती। पृथ्वी के गुण — रूप, रस, गंध, स्पर्श होते हैं, जबकि जल में केवल रस, अग्नि में केवल रूप, वायु में केवल स्पर्श होता है।
Q76. वैशेषिक में 'समवाय' संबंध का उदाहरण कौन-सा है?
B) आत्मा और शरीर का संबंध
C) मन और बुद्धि का संबंध
D) शरीर और वायु का संबंध
A) गंध का पृथ्वी में होना
व्याख्या: समवाय संबंध वह है जिसमें कोई वस्तु किसी अन्य वस्तु में अविच्छिन्न रूप से स्थित होती है, जैसे — गुण का अपने द्रव्य में। **गंध का पृथ्वी में होना** समवाय का उदाहरण है क्योंकि गंध पृथ्वी में स्थायी रूप से विद्यमान है।
Q77. वैशेषिक में 'संयोग' संबंध का क्या स्वरूप है?
B) परमाणु का विस्फोट
A) दो स्वतंत्र वस्तुओं का एक साथ आना
C) कर्म का फल
D) मन का स्थिर होना
व्याख्या: 'संयोग' वैशेषिक का एक संबंध है जिसमें **दो स्वतंत्र द्रव्यों का एक स्थान पर साथ आना** होता है। जैसे – हाथ और कलम का संबंध। संयोग अस्थायी होता है और कर्म से उत्पन्न होता है।
Q78. वैशेषिक दर्शन में 'मोक्ष' की स्थिति कैसी मानी गई है?
A) दुखों की पूर्ण निवृत्ति और कर्म का अभाव
B) ईश्वर से मिलन
C) स्वर्ग प्राप्ति
D) तप से सिद्धि
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में मोक्ष का अर्थ है — आत्मा का **संपूर्ण दुखों से छुटकारा**, कर्मों का क्षय और पुनर्जन्म का अंत। इसमें आत्मा निष्क्रिय अवस्था में रहती है, न कोई सुख अनुभव करती है, न दुख। यह शुद्ध स्थिति है।
Q79. वैशेषिक में 'अनुभव' की प्रमाणता किस पर निर्भर करती है?
B) स्मृति पर
A) प्रत्यक्ष और अनुमान पर
C) शब्द प्रमाण पर
D) उपमान पर
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन केवल **दो प्रमाणों** को स्वीकार करता है — **प्रत्यक्ष (direct perception)** और **अनुमान (inference)**। इन्हीं के आधार पर किसी भी अनुभव को यथार्थ या मिथ्या माना जाता है। अन्य प्रमाण जैसे शब्द, उपमान आदि को नहीं स्वीकारा गया।
Q80. वैशेषिक दर्शन का अंतिम उद्देश्य क्या है?
B) तर्क में कुशलता
C) वेदों की व्याख्या
D) सामाजिक व्यवस्था
A) मोक्ष की प्राप्ति
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन का अंतिम उद्देश्य **मोक्ष** है — अर्थात जन्म–मृत्यु के चक्र से मुक्ति। यह तब संभव होता है जब आत्मा तत्वों का यथार्थ ज्ञान प्राप्त करती है और अविद्या व कर्मों से मुक्त हो जाती है।
Q81. वैशेषिक दर्शन में 'तत्वज्ञान' किसे कहा गया है?
A) पदार्थों के स्वभाव और कार्य का यथार्थ ज्ञान
B) ईश्वर की भक्ति
C) वेदों का पाठ
D) योग साधना
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में तत्वज्ञान का अर्थ है — **सभी नौ द्रव्यों, गुणों, कर्मों, और उनके पारस्परिक संबंधों का सटीक, तात्त्विक और विवेकपूर्ण ज्ञान।** इस ज्ञान के बिना मोक्ष असंभव है।
Q82. वैशेषिक में 'भाव' और 'अभाव' किस श्रेणी में आते हैं?
B) प्रमाण
C) समवाय
A) भेद ज्ञान के साधन
D) विशेष
व्याख्या: 'भाव' अर्थात किसी वस्तु का अस्तित्व, और 'अभाव' उसका अभाव। वैशेषिक में इन्हें **भेद ज्ञान का साधन** माना गया है, जिससे हम वस्तुओं के अस्तित्व-अनस्तित्व को जान सकते हैं। अभाव को भी एक 'पदार्थवत सत्ता' माना गया है।
Q83. वैशेषिक में आत्मा के कितने गुण बताए गए हैं?
B) चार
A) नौ
C) दो
D) बारह
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में आत्मा के **9 गुण** बताए गए हैं — इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुख, ज्ञान, संकल्प, यत्न और धर्म-अधर्म। ये सभी आत्मा में स्थित होते हैं और आत्मा के चैतन्य स्वरूप को प्रकट करते हैं।
Q84. वैशेषिक दर्शन का प्रारंभ किस उद्देश्य से हुआ था?
A) मोक्ष प्राप्त करने हेतु तत्वों का विश्लेषण करना
B) समाज में श्रम विभाजन करना
C) वेदों की रचना करना
D) व्यापार का विस्तार करना
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन का प्रमुख उद्देश्य है — **मोक्ष की प्राप्ति के लिए तत्वों का वैज्ञानिक एवं विश्लेषणात्मक ज्ञान प्रदान करना।** इसके माध्यम से अज्ञान (अविद्या) दूर होकर आत्मा अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान पाती है।
Q85. वैशेषिक में ज्ञान किस प्रमाण से प्राप्त होता है?
B) वेद और स्मृति
C) उपमान और शब्द
A) प्रत्यक्ष और अनुमान
D) अर्थापत्ति
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में केवल **दो प्रमाणों** को यथार्थ ज्ञान का साधन माना गया है — प्रत्यक्ष (Perception) और अनुमान (Inference)। यह ज्ञान ही मोक्ष का कारण बनता है, इसलिए अन्य प्रमाणों को गौण माना गया है।
Q86. वैशेषिक के अनुसार पदार्थों के अस्तित्व का प्रमाण क्या है?
A) इन्द्रिय और बुद्धि का साक्षात्कार
B) कल्पना
C) श्रुति
D) विश्वास
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन पदार्थों के अस्तित्व की पुष्टि **इन्द्रिय प्रत्यक्ष** और **तर्कयुक्त अनुमान** से करता है। इसका दृष्टिकोण यथार्थवादी है — पदार्थ स्वतंत्र रूप से विद्यमान हैं, चाहे ज्ञाता उन्हें जाने या न जाने।
Q87. वैशेषिक के अनुसार आत्मा कैसी सत्ता है?
B) नश्वर और भौतिक
C) असत्य
D) केवल शरीर तक सीमित
A) नित्य, व्यापक और चैतन्य
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन आत्मा को **नित्य (eternal), व्यापक (all-pervading) और चैतन्य (conscious)** सत्ता मानता है। यह शरीर और मन से अलग है, परंतु इनके साथ संयोग होने पर अनुभव करता है।
Q88. वैशेषिक दर्शन में 'न्याय' और 'वैशेषिक' के बीच मुख्य अंतर क्या है?
B) आत्मा की अवधारणा
A) प्रमाणों की संख्या
C) ईश्वर की मान्यता
D) मोक्ष का स्वरूप
व्याख्या: न्याय दर्शन चार प्रमाणों (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द) को मानता है जबकि वैशेषिक केवल दो — प्रत्यक्ष और अनुमान। यह इन दोनों दर्शनों के बीच का प्रमुख तात्त्विक अंतर है, अन्य बातों में दोनों मिलते-जुलते हैं।
Q89. वैशेषिक में 'धर्म' और 'अधर्म' क्या हैं?
A) आत्मा के गुण जो कर्मफल को प्रभावित करते हैं
B) ईश्वर की इच्छा
C) वेदों के फल
D) शरीर की प्रवृत्ति
व्याख्या: धर्म और अधर्म वैशेषिक में आत्मा के **गुण** माने गए हैं। ये अदृश्य होते हैं परंतु अगले जन्म में फल प्रदान करते हैं। धर्म शुभ कर्म का प्रतीक है और अधर्म अशुभ कर्म का। ये मोक्ष या बंधन के कारक बनते हैं।
Q90. वैशेषिक में मोक्ष की स्थिति कैसी होती है?
B) भक्ति में लीन अवस्था
C) ईश्वर में विलय
A) कर्मों की निवृत्ति और शुद्ध आत्मा की स्थिति
D) स्वर्ग लोक में वास
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में मोक्ष का अर्थ है — **कर्मों का क्षय** और आत्मा की **शुद्ध, स्वतंत्र और निरपेक्ष स्थिति**। इसमें आत्मा किसी भी अनुभूति (सुख-दुख) से परे होती है। यह न निष्क्रियता है, न विलय — बल्कि शुद्ध सत्ता की प्राप्ति है।
Q91. वैशेषिक दर्शन में ‘गुण’ की विशेषता क्या है?
A) यह स्वयम् क्रिया नहीं करता, केवल द्रव्य में स्थित रहता है
B) यह स्वतंत्र रूप से कार्य करता है
C) यह स्वयं द्रव्य होता है
D) यह आत्मा में नहीं पाया जाता
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'गुण' वह तत्त्व है जो **क्रिया नहीं करता**, बल्कि द्रव्य में स्थित रहकर उसकी पहचान को संभव बनाता है। जैसे — रंग, गंध, रस आदि। गुणों का अस्तित्व **समवाय संबंध** से द्रव्य में होता है।
Q92. वैशेषिक दर्शन में ‘विशेष’ की परिभाषा क्या है?
B) जो सामान्यता को प्रकट करता है
C) जो मन के भाव को दर्शाए
D) जो ईश्वर से जुड़ा हो
A) जो नित्य द्रव्यों की परस्पर भिन्नता को बताता है
व्याख्या: 'विशेष' वैशेषिक दर्शन का एक पदार्थ है, जो **नित्य द्रव्यों में आत्म-सत्ता को विशिष्ट करता है**, जैसे — पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, आकाश, काल, दिशा, आत्मा, मन आदि में प्रत्येक का अलग ‘विशेष’ होता है जिससे वे एक-दूसरे से अलग पहचानते हैं।
Q93. वैशेषिक में ‘सामान्य’ किसे कहा गया है?
B) जो केवल एक वस्तु में हो
A) जो अनेक वस्तुओं में समान रूप से पाया जाता है
C) जो अनुभव से परे हो
D) जो केवल आत्मा में हो
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'सामान्य' (जाति) वह तत्त्व है जो **कई वस्तुओं में समान रूप से विद्यमान होता है**। जैसे — 'घटत्व' सभी घटों में पाया जाने वाला सामान्य तत्त्व है। यह ज्ञान में वर्गीकरण की भूमिका निभाता है।
Q94. वैशेषिक दर्शन में ‘समवाय’ संबंध का स्वरूप क्या है?
A) अभिन्न, नित्य और अविच्छिन्न संबंध
B) संयोग के समान
C) कर्म से उत्पन्न
D) केवल आत्मा के साथ
व्याख्या: 'समवाय' संबंध वैशेषिक का विशेष तत्त्व है, जिसे **अभिन्न, अविच्छिन्न और नित्य** कहा गया है। यह गुण और द्रव्य, या अंग और शरीर के बीच का वह संबंध है जो किसी भी प्रकार से अलग नहीं किया जा सकता।
Q95. वैशेषिक के अनुसार ज्ञान उत्पन्न होता है —
B) केवल मन से
C) केवल इन्द्रियों से
A) आत्मा, मन, इन्द्रिय और विषय के संयोग से
D) ईश्वर की कृपा से
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में ज्ञान का उदय तब होता है जब **आत्मा, मन, इन्द्रिय और विषय** चारों तत्वों का समुचित संयोग होता है। आत्मा चेतन है, लेकिन ज्ञान की अनुभूति इन माध्यमों के द्वारा होती है।
Q96. वैशेषिक में ‘मन’ की स्थिति कैसी है?
A) अणुवत, एकदेशी, नित्य
B) व्यापक, नित्य
C) क्षणिक
D) चेतन
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में 'मन' को **अणुवत (atomic), एकदेशी (एक समय में एक वस्तु पर केंद्रित)** और **नित्य** माना गया है। यह आत्मा और इन्द्रियों के बीच **संपर्क स्थापित करने वाला साधन** है।
Q97. वैशेषिक दर्शन में 'आकाश' की विशेषता क्या है?
B) यह गंधगुण से युक्त है
C) यह रूपगुण से युक्त है
D) यह रसगुण से युक्त है
A) यह शब्दगुण से युक्त है
व्याख्या: 'आकाश' वैशेषिक दर्शन का एक नित्य द्रव्य है जिसकी **एकमात्र विशेषता ‘शब्द’ गुण है**। आकाश बिना स्पर्श, गंध, रस या रूप के, केवल शब्द को वहन करता है, इसलिए इसे ‘शब्दगुणी द्रव्य’ कहा गया है।
Q98. वैशेषिक में पदार्थों को कितने भेदों में विभाजित किया गया है?
B) पाँच – द्रव्य, गुण, कर्म, आत्मा, मन
A) सात – द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय, अभाव
C) तीन – द्रव्य, गुण, कर्म
D) दो – पदार्थ, अपदार्थ
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **सात पदार्थों** को स्वीकार किया गया है — **द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य (जाति), विशेष (वेशेष), समवाय (inherence), और अभाव (absence)**। यही इस दर्शन की वैज्ञानिक संरचना को दर्शाता है।
Q99. वैशेषिक दर्शन किस प्रकार के दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है?
A) पदार्थवादी और वैज्ञानिक
B) केवल ईश्वरवादी
C) केवल योग आधारित
D) रहस्यवादी
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन भारतीय दर्शन शास्त्र में सबसे **पदार्थवादी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण** को दर्शाता है। यह वस्तुओं की भौतिकता, गुणों, कारणता और संबंधों का विश्लेषण करता है, जो आधुनिक विज्ञान से भी जुड़ता है।
Q100. वैशेषिक दर्शन के अनुसार ज्ञान और मोक्ष का संबंध कैसा है?
B) ज्ञान से केवल भोग संभव है
C) मोक्ष केवल तप से मिलता है
A) यथार्थ ज्ञान ही मोक्ष का साधन है
D) ज्ञान का मोक्ष से कोई संबंध नहीं
व्याख्या: वैशेषिक दर्शन में **यथार्थ ज्ञान** (true knowledge) को ही **मोक्ष का एकमात्र साधन** माना गया है। जब आत्मा तत्वों को सही तरह से जान लेती है और अज्ञान नष्ट हो जाता है, तभी वह जन्म-मरण के बंधन से मुक्त होती है।
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